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महमूदाबाद में धान खरीद के नाम पर दलाली के खेल का खौफनाक चेहरा उजागर, ₹5 लाख की सुपारी देकर 24 वर्षीय युवक की हत्या का आरोप

RamParkash Vats
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उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद के महमूदाबाद क्षेत्र में सरकारी धान खरीद व्यवस्था के नाम पर कथित दलाली और लाखों रुपये की वित्तीय हेराफेरी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। धान खरीद में दलाली के रुपये और आपसी आर्थिक लेनदेन के विवाद में 24 वर्षीय युवक नीतेश कुमार मौर्य निवासी सरैया महिपत सिंह की हत्या किए जाने के मामले ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। आरोप है कि अपने ही परिचित युवक को रास्ते से हटाने के लिए पांच लाख रुपये की सुपारी दी गई और अपहरण के बाद बेरहमी से हमला कर उसे मौत के मुंह में धकेल दिया गया।

मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी मनोज मौर्य और अन्य आरोपियों को लेकर सामने आ रहे तथ्यों ने सरकारी धान खरीद केंद्रों के आसपास सक्रिय कथित बिचौलियों और दलाली के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
₹24 लाख के लेनदेन से जुड़ा था विवाद प्राप्त जानकारी के अनुसारमृतक नीतेश कुमार मौर्य और मुख्य आरोपी मनोज मौर्य के बीच धान खरीद में कथित दलाली के दस लाख रुपये तथा आरओ प्लांट के नाम पर दिए गए 14 लाख रुपये को लेकर विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि नीतेश लगातार कुल 24 लाख रुपये वापस करने का दबाव बना रहा था। इसी आर्थिक विवाद ने कथित तौर पर खूनी साजिश का रूप ले लिया।
आरोप है कि मनोज मौर्य और अंकित गुप्ता का सरकारी धान खरीद से जुड़े कामकाज में बिचौलियों के माध्यम से आर्थिक लेनदेन होता था। वास्तविक किसानों के स्थान पर कथित तौर पर बिचौलियों के जरिए धान की खरीद और भुगतान से जुड़े खेल में लाखों रुपये की हेराफेरी की गई। हालांकि, इन आरोपों की पूरी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
पांच लाख की सुपारी देकर हत्या कराने का आरोप मामले में सामने आए आरोपों के मुताबिक, मनोज मौर्य ने नीतेश को रास्ते से हटाने के लिए दीपू उर्फ दिलीप कुमार वर्मा को पांच लाख रुपये की सुपारी दी थी। इसके बाद नीतेश का कथित रूप से अपहरण कर उसे सीतापुर जनपद के पिसावां क्षेत्र में ले जाया गया, जहां उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। हमलावर उसे मरणासन्न हालत में छोड़कर चले गए।
आखिरी सांसों तक नहीं हारा नीतेश, पर्ची पर लिख गया नाम इस सनसनीखेज घटनाक्रम का सबसे मार्मिक पहलू यह है कि गंभीर रूप से घायल नीतेश ने अंतिम समय तक हिम्मत नहीं हारी। बताया जाता है कि हमलावर उसे मृत समझकर छोड़ गए थे, लेकिन किसी तरह वह पास के एक ढाबे तक पहुंचा। वहां उसने एक पर्ची पर लिखा— ‘मुझे अस्पताल ले चलो, मनोज ने मरवाया है।’इसके बाद उसे अस्पताल ले जाने का प्रयास किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। मौत से पहले लिखी गई यह पर्ची पूरे मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जा रही है। इसी के आधार पर पुलिस के सामने हत्या की साजिश और आरोपियों की भूमिका से जुड़े कई सवाल खड़े हुए हैं।
धान खरीद केंद्रों पर दलालों का नेटवर्क अब भी सवालों के घेरे में नीतेश हत्याकांड ने सरकारी धान खरीद व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर वास्तविक किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि कथित बिचौलिए फर्जी दस्तावेजों और मिलीभगत के सहारे सरकारी खरीद व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर बिचौलियों के माध्यम से धान की खरीद दिखाकर भुगतान निकाला जा रहा है। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सरकारी खरीद व्यवस्था में सक्रिय लोगों और कथित वित्तीय अनियमितताओं की कई परतें खुल सकती हैं।
चुनावी वर्ष में किसानों के हक की आवाज कौन उठाएगा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकारी धान खरीद व्यवस्था में कथित दलाली और किसानों के शोषण की शिकायतें सामने आ रही हैं, तब जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं? चुनावी वर्ष में किसानों के वोट की अहमियत तो सभी राजनीतिक दल समझते हैं, लेकिन किसानों की उपज, उनके भुगतान और उनके अधिकारों से जुड़े इन गंभीर मुद्दों पर सत्तापक्ष और विपक्ष की सक्रियता कितनी दिखाई दे रही है?
क्या किसानों के हक पर चोट करने वाले कथित बिचौलियों के खिलाफ सभी राजनीतिक दल एकजुट होकर आवाज उठाएंगे? क्या धान खरीद केंद्रों पर होने वाली खरीद, किसानों के पंजीकरण, भुगतान और फर्जी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच होगी? या फिर किसान इसी तरह बिचौलियों के चंगुल में फंसे रहेंगे?
अब जरूरत केवल एक हत्याकांड की जांच की नहीं, बल्कि सरकारी धान खरीद व्यवस्था में कथित दलाली के पूरे नेटवर्क की तह तक जाने की है। प्रशासन को चाहिए कि सभी संबंधित क्रय केंद्रों के अभिलेखों, खरीद के आंकड़ों, किसानों के दस्तावेजों और भुगतान की जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक किसानों को उनका अधिकार मिल सके और सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो सके।

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