
अयोध्याराज्य चीफ ब्यूरो अनुज कुमार जैन प्रदेश राज्य चीफ ब्यूरो अनुज कुमार जैन:धर्म का वास्तविक उद्देश्य केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन में त्याग, संयम, सेवा, करुणा और सदाचार जैसे गुणों का विकास करना है। जब व्यक्ति अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाता है, तभी समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नींव पड़ती है। इसी आध्यात्मिक संदेश के साथ रायगंज दिगंबर जैन मंदिर में त्रिदिवसीय शरदपूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का 93वां जन्मोत्सव एवं 75वां संयम दिवस हर्षोल्लास और श्रद्धाभाव से मनाया गया।
महोत्सव के दौरान भगवान ऋषभदेव का पंचामृत अभिषेक किया गया। जिनालय के शिखर पर कलशारोहण एवं ध्वजारोहण सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म, आस्था और आध्यात्मिक चेतना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इस अवसर पर गणिनी ज्ञानमती माताजी ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि यह पूजा उनकी नहीं, बल्कि संयम और त्याग की है। त्याग से ही व्यक्ति महान बनता है और उसके गुणों की पूजा की जाती है। उनका यह संदेश जीवन में बाहरी आडंबर की अपेक्षा आंतरिक शुद्धता, आत्मानुशासन और सद्कर्मों के महत्व को रेखांकित करता है। वास्तव में, मनुष्य की महानता उसके पद, प्रतिष्ठा अथवा संपत्ति से नहीं, बल्कि उसके आचरण, विचारों और समाज के प्रति समर्पण से निर्धारित होती है।

महोत्सव के दौरान धार्मिक, सामाजिक एवं सेवा कार्यों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। गणिनी ज्ञानमती पुरस्कार के अंतर्गत प्रयागराज की श्रीमती आरती जैन को 2 लाख 51 हजार रुपये की सम्मान राशि, अंगवस्त्र, शॉल एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। यह सम्मान समाज में सेवा, समर्पण और सकारात्मक योगदान की भावना को प्रोत्साहित करने का माध्यम बना।
कार्यक्रम पीठाधीश स्वस्तिश्री रवींद्रकीर्ति स्वामी के सान्निध्य में संपन्न हुआ। शाम को 1008 दीपकों से माताजी की मंगल आरती की गई। देश के लगभग 22 प्रांतों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने महोत्सव को व्यापक धार्मिक स्वरूप प्रदान किया। इस दौरान 93 प्रकार के मिष्ठानों के प्रसाद का अवलोकन किया गया तथा भव्य रथयात्रा निकाली गई। रथयात्रा विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए पुनः जैन मंदिर पहुंची, जिसके साथ शरदपूर्णिमा महोत्सव का समापन हुआ।
समाज के लिए संदेश
गणिनी ज्ञानमती माताजी के जन्मोत्सव और संयम दिवस का संदेश केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। यह प्रत्येक व्यक्ति को आत्मचिंतन करने और अपने जीवन में संयम, विनम्रता, परोपकार तथा नैतिकता को स्थान देने की प्रेरणा देता है। आज जब समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों से गुजर रहा है, ऐसे में त्याग और सेवा की भावना सामाजिक समरसता को मजबूत कर सकती है।
धर्म की सार्थकता तभी है, जब उसके आदर्श हमारे व्यवहार में दिखाई दें। दूसरों के प्रति करुणा, जरूरतमंदों की सहायता, वाणी में मधुरता और आचरण में ईमानदारी ही वे गुण हैं, जो व्यक्ति को समाज के लिए उपयोगी बनाते हैं। शरदपूर्णिमा महोत्सव इसी विचार को पुनः स्थापित करता है कि सच्ची श्रद्धा वही है, जो मनुष्य को बेहतर इंसान बनने और समाज के कल्याण के लिए कार्य करने की प्रेरणा दे।

