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सर्पदंश से बचाव और समय पर उपचार पर जोर, नूरपुर में सर्पा सहायकों का प्रशिक्षण आयोजित

RamParkash Vats
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सिविल अस्पताल नूरपुर में पांच वर्षों के दौरान सर्पदंश के 222 मामले दर्ज; जागरूकता, एंबुलेंस सेवाओं के उपयोग और समय पर अस्पताल पहुंचने पर दिया जोर

नूरपुर से विनय महाजन: सर्पदंश से होने वाली मौतों और दिव्यांगता को रोकने तथा प्रभावित व्यक्तियों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से नूरपुर के सामुदायिक भवन में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ‘सर्पा’ परियोजना के अंतर्गत चयनित सर्पा सहायकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘जीरो स्नेकबाइट डेथ इनिशिएटिव’ के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता बढ़ाना, सर्पदंश की घटनाओं को रोकने के उपायों के प्रति जागरूकता फैलाना और आपातकालीन स्थिति में त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करना रहा।

कांगड़ा जिले के नूरपुर और ज्वालामुखी ब्लॉकों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, हिमाचल प्रदेश के सहयोग से संचालित इस परियोजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश से बचाव और उपचार संबंधी जानकारी लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामसभाओं में सर्पदंश जागरूकता को प्राथमिकता देने का आह्वान

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खंड विकास अधिकारी नूरपुर अशोक कुमार ने पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि सर्पदंश से बचाव और प्राथमिक उपचार से संबंधित विषयों को ग्रामसभा की बैठकों में प्रमुखता से शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि विशेषकर मानसून से पहले ग्रामीण समुदायों को जागरूक करना आवश्यक है, ताकि सर्पदंश की घटनाओं को कम किया जा सके और किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को बिना देरी अस्पताल पहुंचाया जा सके।

उन्होंने बचाव के उपायों, प्राथमिक उपचार के सही तरीकों तथा तत्काल चिकित्सा सहायता लेने के महत्व की जानकारी पंचायत स्तर पर व्यापक रूप से प्रसारित करने पर बल दिया।

खेतों में काम करते समय सावधानी बरतने की सलाह

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सर्पदंश से बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी गई। खेतों में काम करते समय गमबूट पहनने, लंबी घास में चलते समय डंडे का इस्तेमाल करने, पशुशालाओं में पर्याप्त रोशनी रखने तथा घरों और आसपास के क्षेत्रों को ऐसी वस्तुओं से मुक्त रखने की सलाह दी गई, जहां सांप छिप सकते हैं। विशेषज्ञों ने मानसून के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचें

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि सर्पदंश की आशंका होने पर प्रभावित व्यक्ति को शांत रखें, उसकी अनावश्यक गतिविधियां कम करें और जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाएं। घाव को काटने, जहर चूसने, प्रभावित अंग को कसकर बांधने अथवा घरेलू उपचार अपनाने से बचना चाहिए। झाड़-फूंक या अन्य गैर-चिकित्सकीय उपायों के कारण अस्पताल पहुंचने में देरी करना भी जानलेवा साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों ने पलकों का झुकना, धुंधला दिखाई देना, निगलने में कठिनाई, असामान्य रक्तस्राव और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि एंटी-स्नेक वेनम का उपयोग मरीज की चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार योग्य स्वास्थ्य पेशेवरों की देखरेख में किया जाना चाहिए।

पांच वर्षों में सर्पदंश के 222 मामले, समय पर उपचार बड़ी चुनौती

कार्यक्रम के दौरान सिविल अस्पताल नूरपुर में वर्ष 2021 से 2025 के बीच दर्ज सर्पदंश के 222 मामलों की पांच वर्षीय समीक्षा के निष्कर्ष भी साझा किए गए। समीक्षा में अस्पताल पहुंचने में देरी, एंबुलेंस सेवाओं का कम उपयोग तथा चिकित्सा सहायता लेने से पहले धार्मिक स्थलों पर जाने जैसे पहलुओं की पहचान की गई।

इन निष्कर्षों के आधार पर विशेषज्ञों ने समुदाय में जागरूकता बढ़ाने, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग सुनिश्चित करने तथा सर्पदंश के मामलों में समय पर उपचार को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया।

33 ग्राम पंचायतों में जागरूकता गतिविधियां

परियोजना दल के अनुसार, जनवरी 2026 से अब तक 33 ग्राम पंचायतों में सर्पदंश से बचाव और जागरूकता से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जा चुकी हैं। कार्यक्रम में आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं के उपयोग को बढ़ावा देने, स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक उपचार की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय प्रशासन और सामुदायिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी, नुक्कड़ नाटक से दिया जागरूकता संदेश

कार्यक्रम में परियोजना अनुसंधान वैज्ञानिक डॉ. अर्चना फुल, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी नूरपुर डॉ. सतीश पॉल, खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिलबर सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी कांगड़ा डॉ. आर.के. सूद, चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. आशीष, डॉ. राजीव, सर्पा परियोजना के तकनीकी सहयोगी निकुंज कंकोड़िया तथा स्थानीय सर्प रेस्क्यूअर कृष्ण ने विभिन्न विषयों पर जानकारी प्रदान की।

इस अवसर पर नागनी माता मंदिर के ट्रस्टी प्रीतम सिंह अभिषेक को परियोजना के प्रति उनके निरंतर सहयोग के लिए सम्मानित किया गया। कामाक्षी इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग की छात्राओं ने सर्पदंश से बचाव और जागरूकता पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से लोगों को सतर्क रहने, अंधविश्वास से बचने और सर्पदंश की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सर्पदंश की स्थिति में जागरूकता, समय पर अस्पताल पहुंचना और वैज्ञानिक उपचार जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ग्रामीण समुदायों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग के आपसी सहयोग से सर्पदंश से होने वाली मौतों और दिव्यांगता को रोकने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।

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