रेस्ट हाउस में दो घंटे बैठने पर 200 रुपये शुल्क से उठे सवाल, बोले—तंगहाली के दौर में जनता से ऐसी वसूली कितनी जनहितकारी? सरकार फैसले पर करे पुनर्विचार

नूरपुर— लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान की राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य पीसी विश्वकर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी रेस्ट हाउस में वेटिंग रूम अथवा हॉल के उपयोग के लिए किराया निर्धारित किए जाने के निर्णय पर सवाल उठाए हैं। प्रेस नोट जारी करते हुए विश्वकर्मा ने कहा कि जिस तरह केंद्र सरकार छोटी-छोटी वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स लगाकर राजस्व जुटाती है, उसी तरह हिमाचल प्रदेश सरकार भी आम जनता से विभिन्न माध्यमों से राजस्व वसूलकर अपना खजाना मजबूत करने में लगी हुई है।
विश्वकर्मा ने कहा कि पहले सरकारी रेस्ट हाउस में कमरा लेने के लिए 500 रुपये किराया निर्धारित किया गया था। अब कथित तौर पर वेटिंग रूम या हॉल में करीब दो घंटे तक किसी व्यक्ति के इंतजार करने अथवा थोड़ी देर रुककर फ्रेश होने पर भी 200 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या व्यवस्था परिवर्तन का यही स्वरूप है और क्या इस तरह के फैसले को वास्तव में जनहित का निर्णय माना जा सकता है? उन्होंने कहा कि प्रदेश में आर्थिक दबाव और महंगाई के बीच आम आदमी पहले ही अनेक प्रकार के खर्चों से परेशान है, ऐसे में सरकारी विश्राम गृह की बुनियादी सुविधा के इस्तेमाल पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से जनता को क्या राहत मिलेगी।
पीसी विश्वकर्मा ने कहा कि सरकार यदि राजस्व बढ़ाने के लिए इस प्रकार के छोटे-छोटे शुल्कों पर निर्भर कर रही है, तो यह विचार करने का विषय है कि इससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति में कितना वास्तविक सुधार आएगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि रेस्ट हाउस के वेटिंग रूम और हॉल के लिए निर्धारित 200 रुपये शुल्क संबंधी निर्णय की एक बार फिर समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि राजस्व जुटाने की प्रक्रिया में आम जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे फैसले लेते समय जनसुविधा और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

