(1) मानसून की विदाई के बीच फिर बदलेगा हिमाचल का मौसम
शिमला– हिमाचल प्रदेश में मानसून की विदाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन मौसम एक बार फिर करवट लेने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश से मानसून अगले 48 घंटों के दौरान पूरी तरह विदा हो सकता है। इसके बाद 5 अक्टूबर से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना जताई गई है, जिसके प्रभाव से प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम खराब हो सकता है।
मौसम में बदलाव के चलते ऊंचाई वाले क्षेत्रों के साथ-साथ मध्यवर्ती इलाकों में भी बारिश होने की संभावना है। 6 और 7 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर तेज हवाएं चलने का अनुमान है। इससे तापमान में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
मौसम विभाग ने किसानों और बागवानों को मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखने की सलाह दी है। विशेष रूप से सेब उत्पादक क्षेत्रों में बारिश और हवाओं के कारण फसल प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए सावधानी बरतने की जरूरत है।
प्रदेश में मानसून की विदाई के साथ आमतौर पर मौसम शुष्क होने लगता है, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से कुछ दिनों के लिए बारिश का दौर लौट सकता है। विभाग ने आगामी दिनों में मौसम की स्थिति को देखते हुए स्थानीय स्तर पर जारी होने वाले अपडेट पर ध्यान देने की अपील की है।
(2)हिमाचल में आपदा से नुकसान 3,412 करोड़ रुपये के पार, पर्वतीय राज्यों के लिए अलग राहत मानदंड की मांग
शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का आंकड़ा 3,412.80 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। भारी बारिश, बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाओं से प्रदेश के कई हिस्सों में सड़क, पुल, पेयजल योजनाओं, बिजली व्यवस्था और सरकारी तथा निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। आपदा के कारण कई क्षेत्रों में जनजीवन भी प्रभावित हुआ है।
प्रदेश सरकार लगातार केंद्र से आपदा प्रभावित हिमाचल के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता की मांग कर रही है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पर्वतीय राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं की गंभीरता को देखते हुए राहत एवं पुनर्वास के लिए अलग मानदंड तय करने की मांग उठाई है।
सरकार का कहना है कि पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल में सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की भरपाई मैदानी राज्यों की तुलना में अधिक महंगी पड़ती है। ऐसे में मौजूदा राहत मानकों से वास्तविक नुकसान की भरपाई करना चुनौतीपूर्ण रहता है।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण और जरूरी सेवाओं को बहाल करना सरकार के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब निगाहें केंद्र से मिलने वाली अतिरिक्त सहायता और आगामी राहत पैकेज पर टिकी हैं।
(3)केंद्र की टीम ने छह जिलों में आपदा नुकसान का लिया जायजा
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान भारी बारिश, बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन से हुए नुकसान का आकलन करने पहुंची सात सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने अपना चार दिवसीय दौरा पूरा कर लिया है। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम. रामचंद्रुडु के नेतृत्व में टीम ने प्रदेश के कांगड़ा, चंबा, मंडी, कुल्लू, शिमला और सोलन जिलों के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
केंद्रीय दल ने प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों, पुलों, पेयजल योजनाओं, बिजली व्यवस्था, मकानों, कृषि, पशुपालन और अन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का मौके पर निरीक्षण किया। इसके अलावा जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से राहत एवं पुनर्स्थापना कार्यों की प्रगति की जानकारी भी ली गई।
शिमला में मुख्य सचिव केके पंत की अध्यक्षता में केंद्रीय दल ने प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी टीम के साथ बैठक कर प्रदेश में हुए नुकसान और राहत-पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक सहायता की जानकारी दी। राज्य सरकार ने केंद्र से सहायता राशि जल्द जारी करने का आग्रह किया है।केंद्रीय टीम की रिपोर्ट के आधार पर आगे की राहत और पुनर्निर्माण सहायता पर निर्णय लिया जाएगा।
(4) केंद्र की टीम ने आपदा नुकसान का आकलन किया —
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान भारी बारिश, बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन से हुए नुकसान का आकलन करने पहुंची सात सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने अपना चार दिवसीय दौरा पूरा कर लिया है। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम. रामचंद्रुडु के नेतृत्व में टीम ने प्रदेश के कांगड़ा, चंबा, मंडी, कुल्लू, शिमला और सोलन जिलों के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
केंद्रीय दल ने प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों, पुलों, पेयजल योजनाओं, बिजली व्यवस्था, मकानों, कृषि, पशुपालन और अन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का मौके पर निरीक्षण किया। इसके अलावा जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से राहत एवं पुनर्स्थापना कार्यों की प्रगति की जानकारी भी ली गई।
शिमला में मुख्य सचिव केके पंत की अध्यक्षता में केंद्रीय दल ने प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी टीम के साथ बैठक कर प्रदेश में हुए नुकसान और राहत-पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक सहायता की जानकारी दी। राज्य सरकार ने केंद्र से सहायता राशि जल्द जारी करने का आग्रह किया है।केंद्रीय टीम की रिपोर्ट के आधार पर आगे की राहत और पुनर्निर्माण सहायता पर निर्णय लिया जाएगा।
(5) सुक्खू सरकार फिर लेगी 600 करोड़ रुपये का कर्ज
शिमला– हिमाचल प्रदेश सरकार चालू वित्त वर्ष 2026-27 में विकास कार्यों और अपनी प्रतिबद्ध वित्तीय देनदारियों को पूरा करने के लिए 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी लेने जा रही है। वित्त विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार सरकार 7.78 प्रतिशत ब्याज दर वाली हिमाचल प्रदेश सरकारी प्रतिभूतियों को दोबारा जारी करेगी।
इस नई उधारी के साथ चालू वित्त वर्ष में प्रदेश सरकार की घोषित बाजार उधारी करीब 4,800 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। इससे पहले जुलाई तक 2,800 करोड़ रुपये, अगस्त में 700 करोड़ और सितंबर में 700 करोड़ रुपये की उधारी की जा चुकी है।
नई प्रतिभूतियों की नीलामी 6 अक्टूबर को भारतीय रिजर्व बैंक के मुंबई कार्यालय के माध्यम से ई-कुबेर पोर्टल पर होगी। इन प्रतिभूतियों की अवधि 18 वर्ष रखी गई है और मूल राशि का भुगतान 24 जून 2044 को किया जाएगा। ब्याज का भुगतान साल में दो बार किया जाएगा।
सरकार के अनुसार कर्ज से प्राप्त राशि का इस्तेमाल विकास कार्यक्रमों और अन्य प्रतिबद्ध वित्तीय जरूरतों के लिए किया जाएगा। नई उधारी के साथ प्रदेश की वित्तीय स्थिति और बढ़ते कर्ज का मुद्दा एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा में है।
(6)किन्नौर में सतलुज नदी के बीच फंसा बैल, रेस्क्यू में जुटे लोग
किन्नौर– हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर में काशंग नाले के समीप सतलुज नदी के बीच एक बैल के कई दिनों से फंसे होने की सूचना सामने आई है। नदी के तेज बहाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बैल को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
बताया जा रहा है कि बैल नदी के बीच एक सुरक्षित स्थान पर फंसा हुआ है। स्थानीय लोगों की नजर उस पर पड़ने के बाद उसे बचाने के प्रयास शुरू किए गए। हालांकि सतलुज में पानी का बहाव तेज होने के कारण सीधे नदी में उतरकर रेस्क्यू करना जोखिम भरा बताया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर प्रशासन और संबंधित बचाव दल से भी संपर्क किया गया है। रेस्क्यू टीम नदी के बहाव, आसपास के क्षेत्र और बैल तक पहुंचने के सुरक्षित रास्ते का आकलन कर रही है। प्रयास है कि किसी तरह बैल को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित किनारे तक लाया जाए।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले में जल्द प्रभावी कार्रवाई कर बैल को सुरक्षित निकाला जाए। किन्नौर जैसे पहाड़ी क्षेत्र में नदी और नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका रहती है, इसलिए रेस्क्यू अभियान में विशेष सावधानी बरतना जरूरी माना जा रहा है।
(7)सेब का खरीद मूल्य 13 रुपये करने का ऐलान, दिसंबर से दूध के समर्थन मूल्य में भी बढ़ोतरी
शिमला। हिमाचल प्रदेश के बागवानों के लिए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सेब की खरीद को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने सेब का खरीद मूल्य बढ़ाकर 13 रुपये प्रति किलो करने की बात कही है। सरकार के इस निर्णय से सेब उत्पादकों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।
सेब हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हजारों बागवान परिवारों की आय का प्रमुख आधार है। ऐसे में खरीद मूल्य में बढ़ोतरी को बागवानी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार की ओर से बागवानों को उत्पादन लागत और बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राहत देने पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही दिसंबर से दूध के समर्थन मूल्य में भी बढ़ोतरी करने की बात कही है। इससे प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों को भी लाभ मिलने की संभावना है। सरकार का कहना है कि कृषि और बागवानी के साथ पशुपालन को मजबूत करने के लिए किसानों-बागवानों की आय बढ़ाना जरूरी है।सेब और दूध दोनों ही हिमाचल के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका से जुड़े हैं। ऐसे में सरकार की इन घोषणाओं पर बागवानों और दुग्ध उत्पादकों की नजर बनी हुई है।
(8) हिमाचल में 14 पुलिस अधिकारियों को पदोन्नति, सात इंस्पेक्टर और सात सब-इंस्पेक्टर शामिल
शिमला। हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग में 14 अधिकारियों की पदोन्नति किए जाने की जानकारी सामने आई है। पदोन्नति पाने वालों में सात इंस्पेक्टर और सात सब-इंस्पेक्टर शामिल हैं। विभागीय स्तर पर जारी आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां और पदभार सौंपे जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
पदोन्नति को पुलिस विभाग में लंबे समय से सेवाएं दे रहे अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय माना जा रहा है। विभाग में पदोन्नति के साथ अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी बढ़ेंगी और उन्हें कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण तथा पुलिस प्रशासन से जुड़े कार्यों में अधिक दायित्व निभाना होगा।
प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। पदोन्नति के बाद अधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर समन्वय और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की अपेक्षा की जा रही है।
विभागीय स्तर पर नई तैनाती और जिम्मेदारियों से संबंधित आदेशों के अनुसार अधिकारी आगे कार्यभार संभालेंगे। पुलिस विभाग में पदोन्नति की प्रक्रिया सेवा नियमों और विभागीय मापदंडों के तहत की जाती है।
(9)भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेललाइन पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, भूमि अधिग्रहण की अधिसूचनाएं रद्द
शिमला/बिलासपुर– भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी ब्रॉडगेज रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने भूमि अधिग्रहण की समयसीमा बढ़ाने वाली राज्य सरकार की तीन अधिसूचनाओं को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। मामला बिलासपुर सदर तहसील के अपरली भटेड़, बरमाणा और खतेड़ सहित प्रभावित क्षेत्रों की निजी भूमि से जुड़ा था।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पाया कि सरकार ने 29 मार्च 2023 को प्रारंभिक अधिसूचना जारी करने के बाद निर्धारित अवधि में अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं की। इसके बाद समयसीमा 16 मार्च 2024, 24 मार्च 2025 और 25 मार्च 2026 को बढ़ाई गई। अदालत के अनुसार इन विस्तारों के पीछे ठोस और लिखित कारण दर्ज नहीं किए गए थे।
अदालत ने भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 19(7) का हवाला देते हुए कहा कि समयसीमा बढ़ाने के कारणों को स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड करना आवश्यक है। सरकारी फाइलों में भी देरी के वास्तविक कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं पाए गए। इसके चलते अदालत ने मूल प्रारंभिक अधिसूचना को भी कानून के तहत समाप्त माना है।
यह फैसला करीब 538 बीघा निजी भूमि से जुड़े अधिग्रहण पर प्रभाव डालता है। रेल परियोजना की आगे की प्रक्रिया पर अब संबंधित सरकारी विभागों और रेलवे की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।
(10)सिंबलवाड़ा के आसपास फिर शुरू हुए स्टोन क्रशर, ईको-सेंसिटिव जोन का मामला चर्चा में
नाहन। सिरमौर जिले के कर्नल शेर जंग राष्ट्रीय उद्यान, सिंबलवाड़ा के आसपास ईको-सेंसिटिव जोन (ESZ) की अधिसूचना रद्द होने के बाद कम से कम दो स्टोन क्रशरों के दोबारा संचालन की जानकारी सामने आई है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अप्रैल 2026 में ईको-सेंसिटिव जोन से संबंधित अधिसूचना को प्रक्रियागत कमियों और स्थानीय स्तर पर आवश्यक परामर्श नहीं किए जाने के आधार पर रद्द कर दिया था।
वर्ष 2022 में जारी ESZ अधिसूचना के तहत राष्ट्रीय उद्यान के आसपास 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों, जिनमें स्टोन क्रशिंग और खनन भी शामिल था, पर प्रतिबंध था। अधिसूचना रद्द होने के बाद क्षेत्र में फिलहाल वह सुरक्षा व्यवस्था लागू नहीं है। इसी कानूनी स्थिति के बीच बंद पड़े कुछ क्रशरों के दोबारा चलने की बात सामने आई है।
सिंबलवाड़ा क्षेत्र जैव विविधता और वन्यजीवों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। पर्यावरण एवं वन विभाग से जुड़े अधिकारियों ने भी क्रशरों के दोबारा संचालन को लेकर चिंता जताई है। बताया गया है कि राज्य सरकार ने अभी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करने अथवा नई ESZ अधिसूचना जारी करने पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है।फिलहाल क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय औद्योगिक गतिविधियों के बीच संतुलन का मुद्दा प्रमुख बना हुआ है।

