
शिमला/नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव-2027 से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। एक ओर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का दिल्ली दौरा और कांग्रेस हाईकमान के साथ बैठकों ने मंत्रिमंडल विस्तार व संगठनात्मक बदलाव की चर्चाओं को हवा दी है, वहीं दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने पंचायत एवं स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों को आधार बनाकर कांग्रेस सरकार पर राजनीतिक हमला तेज कर दिया है।
दिल्ली दौरे से कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज
मुख्यमंत्री सुक्खू 28 सितंबर को विधायक सुंदर सिंह ठाकुर को साथ लेकर दिल्ली पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार मंगलवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में उनकी भागीदारी प्रस्तावित थी। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर भी दिल्ली पहुंचे हैं और पार्टी नेतृत्व के साथ उनकी अलग मुलाकात की चर्चा है। ऐसे में मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे को मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन से जुड़े फैसलों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
कैबिनेट विस्तार का मुद्दा सितंबर की शुरुआत से ही कांग्रेस की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। इससे पहले भी मुख्यमंत्री सुक्खू कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। विभिन्न रिपोर्टों में कुल्लू विधायक सुंदर सिंह ठाकुर और पालमपुर विधायक आशीष बुटेल के नाम मंत्री पद की संभावित दावेदारी में चर्चा में रहे हैं।
इसके साथ ही मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव की अटकलें भी सामने आती रही हैं। हालांकि इन अटकलों की अंतिम पुष्टि कांग्रेस हाईकमान या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से नहीं हुई है।
जयराम ठाकुर ने चुनाव परिणामों को बनाया हमला का आधार
दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने पांवटा साहिब में भाजपा समर्थित नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सम्मान समारोह में कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि हालिया पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को व्यापक समर्थन मिला है। जयराम ठाकुर के अनुसार प्रदेश में अब तक हुए 11 जिला परिषद चुनावों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने 10 में जीत दर्ज की है।
जयराम ठाकुर ने इन चुनाव परिणामों को कांग्रेस के लिए राजनीतिक संदेश बताते हुए सरकार और सत्तारूढ़ दल के भीतर कथित असंतोष का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में अलग-अलग गुटों के बीच खींचतान चल रही है और इसी कारण पार्टी के नेता बार-बार दिल्ली का रुख कर रहे हैं। ये आरोप नेता प्रतिपक्ष के राजनीतिक दावे हैं।
2027 की तैयारी का बढ़ता दबाव
हिमाचल में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। ऐसे में मंत्रिमंडल और संगठन में संभावित बदलावों को लेकर कांग्रेस के भीतर राजनीतिक चर्चा स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है। दूसरी तरफ भाजपा पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों को अपने पक्ष में राजनीतिक संदेश के तौर पर प्रस्तुत कर रही है।
फिलहाल तस्वीर यह है कि कांग्रेस में दिल्ली स्तर पर संगठन और सरकार से जुड़े फैसलों पर मंथन जारी है, जबकि भाजपा इन घटनाक्रमों को लेकर कांग्रेस सरकार पर हमलावर है। कैबिनेट विस्तार में किन चेहरों को जगह मिलती है और क्या विभागीय फेरबदल होता है, इस पर अब प्रदेश की निगाहें टिकी हैं। अंतिम फैसला सामने आने के बाद ही इन चर्चाओं की वास्तविक दिशा स्पष्ट होगी।

