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वकील बदलने से पहले पुराने अधिवक्ता की NOC हर मामले में अनिवार्य नहीं, नियम नए वकील की पेशी से जुड़ा

RamParkash Vats
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NOC को लेकर फैला दावा भ्रामक; बार काउंसिल नियम नए अधिवक्ता की पेशी से जुड़े हैं, क्लाइंट के वकील बदलने के अधिकार पर पूर्ण रोक नहीं।

जांच पड़ताल में पाया। गया कि…………

**बार काउंसिल के Rule 39 में पुराने वकील की सहमति का प्रावधान, NOC न मिलने पर अदालत से अनुमति लेने का रास्ता खुला

नई दिल्ली: सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों में यह दावा किया जा रहा है कि अब किसी भी मामले में वकील बदलने से पहले पुराने वकील से No Objection Certificate (NOC) लेना अनिवार्य कर दिया गया है। कानूनी प्रावधानों की पड़ताल करने पर यह दावा पूरी तरह सही नहीं पाया जाता।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के Professional Conduct and Etiquette संबंधी नियमों के Rule 39 के अनुसार, यदि किसी मामले में किसी पक्ष की ओर से पहले से किसी अधिवक्ता का Vakalatnama या Memo of Appearance दाखिल है, तो दूसरा अधिवक्ता सामान्यतः पहले से नियुक्त अधिवक्ता की सहमति के बिना पेश नहीं हो सकता। हालांकि, यदि पुराना अधिवक्ता सहमति नहीं देता है या उसकी सहमति उपलब्ध नहीं है, तो नया अधिवक्ता अदालत के समक्ष कारण बताते हुए अनुमति मांग सकता है। अदालत की अनुमति मिलने के बाद वह मामले में पेश हो सकता है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी क्लाइंट को हमेशा अपने पुराने वकील की अनुमति लेकर ही नया वकील नियुक्त करने का अधिकार है। न्यायिक व्याख्या में Rule 39 को मुख्य रूप से अधिवक्ताओं के पेशेवर आचरण से जुड़ा प्रावधान माना गया है। एक न्यायिक निर्णय में स्पष्ट किया गया कि यह नियम मुकदमेबाज को नया अधिवक्ता नियुक्त करने से रोकने वाला प्रावधान नहीं है; इसका संबंध नए अधिवक्ता के पहले से रिकॉर्ड पर मौजूद वकील के स्थान पर पेश होने की प्रक्रिया से ह

इसलिए “हर मामले में वकील बदलने से पहले पुराने वकील से NOC लेना अब अनिवार्य कर दिया गया है” कहना कानूनी स्थिति का अत्यधिक व्यापक और भ्रामक प्रस्तुतिकरण होगा। सही स्थिति यह है कि लंबित मामले में नया अधिवक्ता पेश होने के लिए पुराने अधिवक्ता की सहमति/NOC की आवश्यकता पड़ सकती है, लेकिन NOC न मिलने पर न्यायालय से अनुमति लेने का रास्ता उपलब्ध है।किसी विशेष मामले में संबंधित अदालत के स्थानीय नियम, प्रक्रिया और आदेश भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए केवल NOC न मिलने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए कि क्लाइंट अपना अधिवक्ता बदल ही नहीं सकता।

सार: दावा “NOC हर मामले में अनिवार्य है” = भ्रामक/अधूरा। अधिक सटीक कानूनी भाषा होगी: “पहले से रिकॉर्ड पर मौजूद अधिवक्ता के रहते नया अधिवक्ता पेश होने के लिए सामान्यतः उसकी सहमति/NOC आवश्यक होती है; सहमति न मिलने पर अदालत से अनुमति ली जा सकती है।”

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