पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई आगे बढ़ाने का संकल्प, अवैध व अवैज्ञानिक खनन पर रोक की मांग

सिरमौरसिरमौर से कपिल शर्मा की रिपोर्ट: जिस संगड़ाह की धरती से पर्यावरण संरक्षण की आवाज कभी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची थी, उसी क्षेत्र में सोमवार को एक बार फिर खनन के खिलाफ जनाक्रोश सड़कों पर नजर आया। वसुंधरा संरक्षण समिति, भूतपूर्व सैनिक संगठन सहित विभिन्न संगठनों ने संगड़ाह उपमंडल मुख्यालय में कथित अवैध और अवैज्ञानिक चूना पत्थर खनन के विरोध में आक्रोश रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने पहाड़ों के कटाव, पर्यावरणीय नुकसान और प्राकृतिक जलस्रोतों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई।
पूर्व सैनिक संगठन सिरमौर के अध्यक्ष सेवानिवृत्त मेजर जनरल अतुल कौशिक, वसुंधरा संरक्षण समिति के अध्यक्ष रणजीत चौहान और पीएपीएन कार्यकर्ता सुमित्रा शर्मा सहित अन्य लोगों के नेतृत्व में रैली विश्रामगृह परिसर से शुरू हुई। प्रदर्शनकारी मुख्य बाजार से होते हुए मिनी सचिवालय पहुंचे। इस दौरान खनन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सरकार से मामले में जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग उठाई गई।मुख्य बाजार में आयोजित नुक्कड़ सभा में वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए किंकरी देवी ने संगड़ाह क्षेत्र में लंबा संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि उनके निधन के बाद भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सवाल समाप्त नहीं हुए हैं और स्थानीय स्तर पर इस अभियान को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
सभा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्र में करीब 782 बीघा भूमि पर चल रही चूना पत्थर खनन गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने खनन गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई करने की मांग की।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में अनियंत्रित अथवा नियमों के विपरीत खनन से भू-कटाव, वन क्षेत्र और जलस्रोत प्रभावित होने की आशंका रहती है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से खनन गतिविधियों की निगरानी मजबूत करने तथा पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की।
मेजर जनरल अतुल कौशिक ने क्या कहा
सेवानिवृत्त मेजर जनरल अतुल कौशिक ने कहा कि किंकरी देवी ने पर्यावरण की रक्षा के लिए लंबी लड़ाई लड़ी थी। उनके अनुसार अब उस संघर्ष को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने सरकार से कथित अवैध और अवैज्ञानिक खनन के मामलों में गंभीरता से कार्रवाई करने की मांग की, ताकि पहाड़, जंगल और जलस्रोत सुरक्षित रह सकें।रैली के बाद प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम संगड़ाह के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में खनन से जुड़े मामलों की जांच कराने और नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर आगे भी संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
किंकरी देवी की विरासत फिर चर्चा में
संगड़ाह की पर्यावरण कार्यकर्ता किंकरी देवी ने अपने जीवनकाल में क्षेत्र में चूना पत्थर के खनन के खिलाफ लंबा संघर्ष किया था। उनके आंदोलन ने पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को व्यापक पहचान दिलाई। सोमवार का प्रदर्शन उसी संघर्ष की विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश के रूप में सामने आया। हालांकि खनन से जुड़े आरोपों और पर्यावरणीय प्रभावों पर संबंधित विभाग तथा प्रशासन का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण रहेगा।

