
कांगड़ा में ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर कांग्रेस का प्रदर्शन
कांगड़ा। हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल के आह्वान पर 28 सितंबर को प्रदेश के जिला मुख्यालयों में कांग्रेस ने ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर जवाबदेही जरूरी है। पाटिल ने 26 सितंबर को शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान 28 सितंबर को जिला स्तर पर प्रदर्शन की घोषणा की थी। उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए। कांगड़ा में प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस ने इस मुद्दे को स्थानीय राजनीतिक स्तर पर उठाने की तैयारी की।
पवन काजल ने ग्रामीण विकास के लिए 3,744 करोड़ का मुद्दा उठाया
कांगड़ा। भाजपा विधायक पवन काजल ने ग्रामीण विकास और पंचायती राज से जुड़े वित्तीय आवंटन को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार 16वें वित्त आयोग के तहत हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि में ग्रामीण विकास और पंचायती राज के लिए 3,744 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ है। उनका कहना है कि इस राशि से पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को गति मिल सकती है। 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट 2026-27 से 2030-31 की पांच वर्षीय अवधि के लिए है।
कांगड़ा के संस्थानों को लेकर भाजपा ने सरकार पर उठाए सवाल
धर्मशाला। भाजपा के वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने कांगड़ा के प्रमुख संस्थानों की स्थिति को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुसंधान से जुड़े संस्थानों में धन, कर्मचारियों और बुनियादी सुविधाओं की कमी है। कपूर ने टांडा मेडिकल कॉलेज, कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर और केंद्रीय विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने सरकार से संस्थानों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। ये आरोप भाजपा नेता की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इस बयान के साथ सरकार का विस्तृत जवाब दर्ज नहीं है।
कांगड़ा में आपदा नुकसान के आकलन को लेकर केंद्रीय टीम का दौरा
कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान हुए नुकसान के आकलन के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने 28 सितंबर से प्रदेश के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा शुरू किया। चार दिवसीय दौरे में कांगड़ा और चंबा समेत छह जिलों को शामिल किया गया है। राज्य सरकार के अनुसार इस मानसून में बादल फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाओं से प्रदेश में करीब 3,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सरकार ने केंद्र से राहत और मुआवजे की मांग की है। केंद्रीय टीम के दौरे से प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान के आकलन और राहत संबंधी प्रक्रिया पर नजरें टिकी हैं।
परागपुर बना नया उपमंडल, 46 पटवार सर्किल होंगे अधीन
जसवां-परागपुर। कांगड़ा जिले में प्रशासनिक ढांचे में बदलाव करते हुए परागपुर को नया उपमंडल बनाया गया है। सरकार की अधिसूचना के अनुसार नए उपमंडल के अधीन चार तहसीलों के 46 पटवार सर्किल शामिल किए गए हैं। इनमें रक्कड़, जसवां, डाडासीबा और परागपुर तहसील के पटवार वृत्त शामिल हैं। परागपुर को उपमंडल का दर्जा मिलने के बाद निशांत कुमार ने एसडीएम के रूप में कार्यभार संभाला है। प्रशासनिक पुनर्गठन का उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को राजस्व और अन्य सरकारी सेवाओं के लिए अधिक सुगम प्रशासनिक व्यवस्था उपलब्ध कराना बताया गया है।
कांगड़ा में सियासत तेज, प्रदर्शन से लेकर आपदा राहत और विकास तक कई मुद्दे
कांगड़ा EDITIR RAM PARKASH: 28 सितंबर 2026 को कांगड़ा की राजनीति में कई मुद्दे एक साथ चर्चा के केंद्र में रहे। कांग्रेस के प्रस्तावित जिला स्तरीय प्रदर्शन से लेकर भाजपा की ओर से विकास और कांगड़ा के प्रमुख संस्थानों से जुड़े सवालों तक राजनीतिक गतिविधियां तेज नजर आईं। इसके साथ ही मानसून से हुए नुकसान का जायजा लेने केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी टीम के कांगड़ा पहुंचने से आपदा राहत का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया।
हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने 26 सितंबर को शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान 28 सितंबर को प्रदेश के जिला मुख्यालयों में कथित ‘वोट चोरी’ और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन की घोषणा की थी। कांग्रेस ने मतदाता सूचियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर चुनाव आयोग और भाजपा का पक्ष अलग-अलग स्तर पर सामने आता रहा है।
दूसरी ओर, कांगड़ा में भाजपा ने विकास कार्यों और जिले के प्रमुख संस्थानों की स्थिति को राजनीतिक मुद्दा बनाया है। भाजपा नेता त्रिलोक कपूर ने प्रदेश सरकार पर कांगड़ा के प्रमुख संस्थानों की कथित अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों में सुविधाओं तथा संसाधनों से जुड़े सवाल उठाए। यह भाजपा का पक्ष है और इसे राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
ग्रामीण विकास से जुड़ा वित्तीय आवंटन भी कांगड़ा की राजनीतिक चर्चा में है। भाजपा विधायक पवन काजल ने 16वें वित्त आयोग के तहत हिमाचल को मिलने वाले ग्रामीण विकास और पंचायती राज से जुड़े फंड का उल्लेख करते हुए इसे पंचायतों के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया है। 16वें वित्त आयोग की आधिकारिक रिपोर्ट वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि से संबंधित है।
इसी बीच, मानसून आपदा का मुद्दा कांगड़ा में राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना हुआ है। भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान का जमीनी आकलन करने के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम 28 सितंबर को कांगड़ा पहुंची। टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण शुरू किया और अधिकारियों से नुकसान की जानकारी ली। प्रदेश सरकार ने मानसून से हुए नुकसान के लिए केंद्र से आर्थिक सहायता की मांग की है।
कांगड़ा में आपदा से हुए नुकसान का आकलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सड़कों, पुलों, पेयजल योजनाओं, कृषि भूमि और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचने की रिपोर्टें सामने आई हैं। केंद्रीय टीम के निरीक्षण के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट राहत और सहायता से जुड़े आगामी निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कुल मिलाकर 28 सितंबर को कांगड़ा की राजनीति में चुनावी प्रक्रिया, विकास निधि, संस्थानों की स्थिति और आपदा राहत जैसे मुद्दे एक साथ दिखाई दिए। कांग्रेस जहां चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा विकास और संस्थागत मुद्दों के माध्यम से सरकार को घेर रही है। आने वाले दिनों में केंद्रीय टीम की रिपोर्ट और राजनीतिक दलों के अगले कदमों से इन मुद्दों पर बहस और तेज होने की संभावना है।

