
आर्यिका विविक्त श्री माता*महमूदाबाद (सीतापुर) स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सीता ग्रुप ऑफ एजुकेशन के शास्त्री सभागार में बाल धर्म सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत गौरव आर्यिका 105 श्री विविक्त श्री माता ने कहा कि अहिंसा का मार्ग ही विश्वशांति का मार्ग है।

आज पूरी दुनिया में युद्ध की संस्कृति दिखाई दे रही है, ऐसे समय में भगवान महावीर के अहिंसा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने पूरे विश्व को अहिंसा का मार्ग दिखाया।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी ने भी भगवान महावीर के इसी अहिंसा के संदेश को अपना आधार बनाया। आज संत समाज भी विश्वशांति की कामना कर रहा है।तिरंगे की महत्ता बताते हुए आर्यिका श्री ने कहा कि केसरिया रंग वीरता और वीर सैनिकों के साहस व बलिदान का प्रतीक है। सफेद रंग विश्वशांति तथा हरा रंग किसानों के परिश्रम और देश की हरियाली का प्रतीक है।

तिरंगे के मध्य स्थित अशोक चक्र धर्मनिरपेक्ष राज्य की भावना को दर्शाता है।बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में प्रगति के लिए व्यसनमुक्त रहना बेहद जरूरी है। भगवान राम ने 14 वर्ष का वनवास बिताया, लेकिन कभी किसी व्यसन का सहारा नहीं लिया।
उन्होंने बच्चों से पान मसाला जैसी बुरी आदतों से दूर रहने तथा शाकाहार अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस मनाते समय हमें अपनी भारतीय संस्कृति और संस्कारों को भी याद रखना चाहिए।आर्यिका विविक्त श्री माता ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार देना भी जरूरी है। शिक्षा से व्यक्ति नौकरी प्राप्त कर सकता है, लेकिन संस्कारों से समाज में सम्मान मिलता है।
उन्होंने बच्चों को असफलता से निराश न होने की सीख देते हुए कहा कि लगातार प्रयास करने से सफलता अवश्य मिलती है।उन्होंने सीता ग्रुप ऑफ एजुकेशन की सराहना करते हुए कहा कि संस्था में बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार भी प्रदान किए जा रहे हैं।कार्यक्रम में सीता ग्रुप ऑफ एजुकेशन पहुंचने पर आर्यिका संघ का बैंड की धुनों के साथ स्वागत किया गया।
बच्चों ने आर्यिका संघ पर पुष्पवर्षा की। संस्था के चेयरमैन रमेश वाजपेई ने श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर जैन समाज के लोगों ने संस्था चेयरमैन को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।

