
ज्वाली: ग्राम पंचायत सिद्धपुर-घाड़ स्थित जगत जननी दुर्गा महामाई मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा वाचक पंडित मुकेश शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए।पंडित मुकेश शास्त्री ने कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है और धर्म की हानि होती है, तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। उन्होंने कंस के अत्याचार, देवकी और वसुदेव की पीड़ा तथा भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण की कथा का विस्तार से वर्णन किया।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन मानव समाज को प्रेम, करुणा, सत्य, धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रीकृष्ण ने अत्याचार और अधर्म के विरुद्ध धर्म की स्थापना का संदेश दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव को बढ़ावा देने का आह्वान किया।कथा के दौरान जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आया, मंदिर परिसर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव जैसा वातावरण बन गया। श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ भक्ति भाव प्रकट किया। इस अवसर पर भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालु भक्तिरस में डूबे नजर आए।
कथा वाचक ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को जीवन के नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की दिशा भी प्रदान करती है। कथा के माध्यम से मनुष्य को सत्य, धर्म, सदाचार और अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा मिलती है।गौरतलब है कि जगत जननी दुर्गा महामाई मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सात दिनों तक चलेगी। कथा का समापन 2 अक्तूबर को होगा। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचकर कथा का श्रवण कर रहे हैं। आयोजकों की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

