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आस्था का अद्भुत केंद्र: जिला कांगड़ा के भरमाड़ स्थित शिब्बोथान धाम की अनूठी महत्ता

RamParkash Vats
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(1 )मन्दिर सिद्ध बाबा शिब्बो थान में भोलेनाथ भंडारी जाहरवीर गोगा के स्वरूप ‌में विराजमान हैं
(2) मन्दिर सिद्ध बाबा शिब्बो थान भरमाड जाहरवीर की पूजा नाम जाप शिव्वो थान नाम से होता है
(3) मन्दिर सिद्ध बाबा शिब्बो थान में गोगा जाहरवीर की मंडली संगलो के रूप में विराजमान हैं

Nurpur: हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के जवाली उपमंडल के भरमाड़ गांव में स्थित शिब्बोथान धाम प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आस्था स्थलों में से एक है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह प्राचीन धाम वर्षों से लाखों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा और विश्वास का केंद्र बना हुआ है। यहां पहुंचने वाला हर श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और दिव्य अनुभूति का अनुभव करता है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार शिब्बोथान धाम एक प्राचीन सिद्धपीठ है। कहा जाता है कि इस पावन स्थल पर ऋषि-मुनियों और साधु-संतों ने कठोर तपस्या की थी, जिससे यह स्थान विशेष आध्यात्मिक शक्ति से संपन्न माना जाता है। भगवान शिव की कृपा से जुड़े इस धाम में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं।

इस धाम की सबसे प्रसिद्ध लोक-मान्यता सर्पदंश से जुड़ी है। वर्षों से आसपास के क्षेत्रों के लोग सर्पदंश से पीड़ित व्यक्तियों को यहां लेकर आते रहे हैं और मंदिर की परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना कराते हैं। यह मान्यता स्थानीय लोक-आस्था का विषय है। साथ ही, सर्पदंश की स्थिति में आधुनिक चिकित्सा उपचार लेना अत्यंत आवश्यक है।

शिब्बोथान धाम का शांत वातावरण, घने वृक्षों की हरियाली और धार्मिक महत्व इसे आध्यात्मिक पर्यटन का भी एक प्रमुख केंद्र बनाते हैं। विशेष रूप से सावन मास, महाशिवरात्रि तथा अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और पूरा क्षेत्र शिवभक्ति के रंग में रंग जाता है।

हर वर्ष जुलाई और अगस्त माह में यहां भव्य मेले आयोजित किए जाते हैं, जिनमें जिला कांगड़ा के अलावा हिमाचल प्रदेश के अन्य जिलों तथा पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। इन मेलों में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और लोक परंपराओं की भी सुंदर झलक देखने को मिलती है।

शिब्बोथान धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक-आस्था, संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। यह पावन स्थल आज भी श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देता है तथा आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है

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