Reading: भक्त प्रहलाद अटूट श्रद्धा, सच्ची भक्ति और दृढ़ निष्ठा का प्रतीक हैं स्वामी विज्ञानानंद ।

भक्त प्रहलाद अटूट श्रद्धा, सच्ची भक्ति और दृढ़ निष्ठा का प्रतीक हैं स्वामी विज्ञानानंद ।

RamParkash Vats
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प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अडिग रही प्रह्लाद की भक्ति, श्री हरि कथा में गूंजा आस्था और विश्वास का संदेश

हिरण्यकश्यपु की यातनाओं के बावजूद भगवान का नाम नहीं छोड़ा, कथा व्यास स्वामी विज्ञानानंद ने श्रद्धालुओं को बताया भक्ति, धैर्य और नैतिक मूल्यों का महत्व

NURPUR: दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से आयोजित पांच दिवसीय श्री हरि कथा के तीसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भगवान श्री हरि की महिमा का श्रवण किया। कथा स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु धार्मिक प्रसंगों में भावविभोर नजर आए।

कथा के तीसरे दिन दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य एवं कथा व्यास स्वामी विज्ञानानंद ने भगवान श्री हरि के परम भक्त प्रह्लाद के जीवन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने प्रह्लाद की अटूट भक्ति, दृढ़ विश्वास और विपरीत परिस्थितियों में भी प्रभु के प्रति अडिग निष्ठा को कथा का केंद्र बनाया।

स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि भक्त प्रह्लाद ने जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियां आईं, लेकिन भगवान के प्रति उनकी श्रद्धा और विश्वास कभी डगमगाया नहीं। उन्होंने कहा कि प्रह्लाद का जीवन यह संदेश देता है कि जब मनुष्य का विश्वास अपने आराध्य के प्रति अटल होता है तो कठिन से कठिन परिस्थिति में भी वह धैर्य और साहस बनाए रख सकता है।

कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बताया कि प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यपु स्वयं को सर्वशक्तिमान मानते थे और भगवान विष्णु की भक्ति के विरोधी थे। इसके बावजूद बालक प्रह्लाद ने भगवान श्री हरि का नाम और उनकी भक्ति नहीं छोड़ी। कथा में प्रह्लाद को दी गई विभिन्न यातनाओं का वर्णन करते हुए बताया गया कि अग्नि, विष, हाथी और ऊंचे स्थान से गिराने जैसे अनेक प्रयास भी उनकी भक्ति और विश्वास को विचलित नहीं कर सके।

स्वामी विज्ञानानंद ने भगवान नरसिंह के प्राकट्य का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब अधर्म अपनी सीमा पार कर गया तो भगवान ने नरसिंह रूप में प्रकट होकर अपने भक्त की रक्षा की और हिरण्यकश्यपु के अत्याचार का अंत किया। कथा के इस प्रसंग पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्री हरि के जयकारे लगाए और वातावरण भक्तिमय हो उठा।

कथा व्यास ने कहा कि आज के समय में मनुष्य छोटी-छोटी परेशानियों और कठिनाइयों में अपना धैर्य खो देता है। ऐसे समय में प्रह्लाद का चरित्र समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि प्रह्लाद ने विपरीत परिस्थितियों में भी संयम, साहस और प्रभु के प्रति विश्वास बनाए रखा। उनका जीवन बताता है कि सच्ची श्रद्धा केवल अनुकूल परिस्थितियों में नहीं, बल्कि कठिन समय में भी अपने विश्वास पर कायम रहने का नाम है।उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में आध्यात्मिक चिंतन, सकारात्मक सोच, संयम और नैतिक मूल्यों को स्थान दें। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को प्रह्लाद जैसे आदर्श चरित्रों से प्रेरणा लेने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि संस्कार और आध्यात्मिकता व्यक्ति के जीवन को सही दिशा प्रदान कर सकते हैं।

स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि आध्यात्मिकता का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति के आचरण और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना भी है। जब मनुष्य के भीतर ईश्वर के प्रति विश्वास, सद्भावना और नैतिकता का भाव मजबूत होता है तो वह जीवन की चुनौतियों का सामना अधिक धैर्य और संतुलन के साथ कर सकता है।पांच दिवसीय श्री हरि कथा के दौरान प्रतिदिन श्रद्धालुओं को धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रसंगों के माध्यम से जीवनोपयोगी संदेश दिए जा रहे हैं। कथा के तीसरे दिन भी श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से कथा का श्रवण किया और भगवान श्री हरि की भक्ति में लीन नजर आए।

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