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85 वर्षीय बुजुर्ग की जमीन हड़पने की साजिश का आरोप, फर्जी मुख्तयार आम बनाकर करोड़ों की भूमि बेचने का प्रयास!

RamParkash Vats
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पौंग बांध भू-माफिया का शिकार पीड़ित पंडित जगदीश शर्मा भरमाड

HEADLINE

  1. कांगड़ा जिले के पौंग बांध विस्थापितों के राजस्थान में आवंटित मुरब्बों को फर्जी दस्तावेज, जाली मुख्तयारनामों और अन्य कथित हथकंडों के जरिए हड़पने के मामले समय-समय पर उजागर होते रहे हैं। इन घटनाओं ने विस्थापित परिवारों की पीड़ा को और बढ़ा दिया है, जो दशकों बाद भी अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं। इन घटनाओं के कारण वर्षों से पोंग बांध विस्थापित परिवारों को भारी मानसिक, आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
  2. डीएसपी नूरपुर से शिकायत, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, पहचान बदलने और जाली हस्ताक्षर/अंगूठा लगाने का आरोप; निष्पक्ष जांच की मांग।
  3. पौंगबांध विस्थापितों के मुरब्बों पर कब्जे की बढ़ती साजिश, वर्षों बाद भी नहीं मिला न्याय
  4. पौंगबांध विस्थापितों की प्रमुख मांगें

1    असली पात्र विस्थापितों को उनके मुरब्बों का अधिकार मिले।

2   फर्जी दस्तावेजों और अवैध कब्जों की निष्पक्ष जांच हो।

3    दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

4   लंबित पुनर्वास मामलों का शीघ्र समाधान किया जाए।

5   पौंगबांध विस्थापित परिवारों को न्याय और सुरक्षित पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।

कांगड़ा/जवाली: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के पौंगबांध विस्थापितों के राजस्थान में आवंटित मुरब्बों पर कथित कब्जों और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से भूमि हड़पने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। विभिन्न तरीकों से मुरब्बों पर अवैध कब्जे करने के आरोपों ने एक बार फिर विस्थापित परिवारों की सुरक्षा और अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पौंगबांध के निर्माण के दौरान हजारों परिवारों ने अपने घर, खेत और पुश्तैनी जमीनें देशहित में कुर्बान कर दी थीं। बदले में राजस्थान में मुरब्बे आवंटित किए गए, ताकि विस्थापित परिवार सम्मानपूर्वक अपना जीवन यापन कर सकें। लेकिन समय के साथ अनेक परिवारों का आरोप है कि उनकी अनुपस्थिति और बढ़ती उम्र का फायदा उठाकर कुछ लोग फर्जी दस्तावेज, जाली मुख्तयार आम (पावर ऑफ अटॉर्नी), फर्जी पहचान और अन्य हथकंडे अपनाकर उनकी जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।

हाल ही में सामने आए एक मामले में 85 वर्षीय पौंगबांध विस्थापित बुजुर्ग ने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी के बिना फर्जी मुख्तयार आम तैयार कर राजस्थान स्थित उनकी भूमि बेचने का प्रयास किया गया। शिकायत के आधार पर जवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना उन अनेक मामलों में से एक है, जिन्होंने पोंग बांध विस्थापितों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

विस्थापित संगठनों का कहना है कि अधिकांश प्रभावित परिवार अब बुजुर्ग हो चुके हैं। कई लोग आर्थिक और शारीरिक कारणों से बार-बार राजस्थान जाकर अपनी जमीनों की निगरानी नहीं कर पाते। ऐसे में कथित भू-माफिया और फर्जीवाड़ा करने वाले तत्व इस स्थिति का फायदा उठाने का प्रयास करते हैं।

पोंग बांध विस्थापित लंबे समय से सरकारों से मांग कर रहे हैं कि राजस्थान में आवंटित मुरब्बों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए, फर्जी दस्तावेजों की गहन जांच हो, भूमि अभिलेखों की नियमित निगरानी की जाए तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि जिन परिवारों ने देशहित में अपना सब कुछ खोया, उन्हें आज भी अपनी वैध जमीन बचाने के लिए अदालतों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

विस्थापितों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसे मामलों की संख्या और बढ़ सकती है। इसलिए आवश्यक है कि हिमाचल प्रदेश और राजस्थान सरकारें आपसी समन्वय से इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालें, ताकि पोंग बांध विस्थापितों के अधिकार सुरक्षित रह सकें और उनकी वर्षों पुरानी पीड़ा का अंत हो सके।

85 वर्षीय बुजुर्ग की जमीन हड़पने की साजिश का आरोप, फर्जी मुख्तयार आम बनाकर करोड़ों की भूमि बेचने का प्रयास!

कांगड़ा जिले के जवाली क्षेत्र के एक 85 वर्षीय पौंगबांध विस्थापित बुजुर्ग ने फर्जी मुख्तयार आम (पावर ऑफ अटॉर्नी) तैयार कर राजस्थान स्थित अपनी जमीन बेचने की कोशिश किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित ने डीएसपी नूरपुर को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता पौंगबांध विस्थापित जगदीश चंद, निवासी गांव भरमाड़, तहसील जवाली, जिला कांगड़ा ने आरोप लगाया है कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना उनके नाम से एक फर्जी मुख्तयार आम तैयार किया गया। इसी दस्तावेज के आधार पर राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में स्थित उनकी कृषि भूमि को बेचने का प्रयास किया गया।

शिकायत के अनुसार, 27 जुलाई 2026 की रात राजस्थान में भूमि की देखरेख कर रहे काश्तकार ने फोन कर सूचना दी कि कुछ लोग खुद को अधिकृत प्रतिनिधि बताकर जमीन बेचने पहुंचे हैं। जब काश्तकार ने इसकी जानकारी शिकायतकर्ता को दी तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति को अपनी भूमि बेचने के लिए कोई मुख्तयार आम नहीं दिया है।

इसके बाद कथित मुख्तयार आम की प्रति देखने पर शिकायतकर्ता के होश उड़ गए। उनका आरोप है कि दस्तावेज में उनका नाम तो लिखा गया, लेकिन आधार संख्या, पहचान और अन्य विवरणों में गंभीर गड़बड़ियां हैं। इतना ही नहीं, जहां वह जीवनभर हस्ताक्षर करते आए हैं, वहां कथित दस्तावेज पर अंगूठे का निशान लगाया गया है।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में कई लोगों की मिलीभगत है। उनका कहना है कि दस्तावेज की तस्दीक के दौरान भी पहचान से संबंधित तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे सरकारी अभिलेखों का दुरुपयोग कर उनकी संपत्ति हड़पने की साजिश रची गई।

पीड़ित ने एसपी नूरपुर से मांग की है कि कथित फर्जी मुख्तयार आम तैयार करने, उसकी तस्दीक कराने और उसके आधार पर जमीन बेचने का प्रयास करने वाले सभी व्यक्तियों की भूमिका की गहन जांच कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं अन्य लागू कानूनों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

पुलिस जांच के बाद ही होगी सच्चाई स्पष्ट

फिलहाल यह मामला शिकायत के आधार पर सामने आया है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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