सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार की आर्थिक नीतियों और विकास कार्यों को लेकर निशाना साधा।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य लगातार बढ़ते कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है और सरकार की वित्तीय स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ठाकुर ने कहा कि आर्थिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के बजाय सरकार ऐसी योजनाओं और घोषणाओं पर आगे बढ़ रही है, जिनका दीर्घकालिक वित्तीय प्रभाव प्रदेश पर पड़ेगा।जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के सामने पहले से ही सीमित राजस्व संसाधन, भौगोलिक कठिनाइयां और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियां हैं।
ऐसे में वित्तीय अनुशासन और केंद्र से मिलने वाली सहायता का प्रभावी उपयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्यों की गति प्रभावित होने का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि सड़कों, स्वास्थ्य संस्थानों, पेयजल योजनाओं और अन्य आधारभूत परियोजनाओं के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उनका कहना था कि यदि सरकार की आर्थिक प्राथमिकताएं स्पष्ट नहीं रहीं तो आने वाले समय में इसका भार प्रदेश की जनता पर पड़ सकता है।पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हिमाचल की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए पर्यटन, जलविद्युत, कृषि-बागवानी और औद्योगिक क्षेत्र में नई संभावनाओं को विकसित करना होगा। उन्होंने सरकार से राजस्व बढ़ाने, अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण और लंबित विकास परियोजनाओं को गति देने की मांग की।ठाकुर ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया गया।
उनके अनुसार वर्तमान सरकार को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय प्रदेश की आर्थिक चुनौतियों के समाधान पर ध्यान देना चाहिए।हालांकि, सरकार की ओर से वित्तीय स्थिति और विकास कार्यों को लेकर अलग-अलग मौकों पर यह कहा जाता रहा है कि प्रदेश की आर्थिक चुनौतियां पुरानी हैं और उन्हें दूर करने के लिए सरकार चरणबद्ध तरीके से कदम उठा रही है। सरकार केंद्र से मिलने वाली आर्थिक सहायता, ऋण और राज्य की आय के बीच संतुलन बनाने की दिशा में प्रयासों की बात करती रही है।
जयराम ठाकुर के बयान से स्पष्ट है कि आगामी राजनीतिक दौर में प्रदेश की अर्थव्यवस्था, कर्ज, विकास कार्य और वित्तीय प्रबंधन प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेंगे। वहीं, सरकार के सामने आर्थिक संसाधनों को बढ़ाने और जनता की विकास संबंधी अपेक्षाओं को पूरा करने की चुनौती बनी हुई है।

