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पौंग बांध प्रबंधन पर उठे सवाल, सहायक खड्डों के जल प्रवाह की अनदेखी से बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा

RamParkash Vats
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अरनी विश्वविद्यालय ने बाढ़ सुरक्षा, नदी प्रबंधन और खनन गतिविधियों की स्वतंत्र जांच की उठाई मांग

जवाली/कांगड़ा, 20 जून,विशेष संवाददाता न्यूज़ इंडिया आजतक
“सवाल केवल पानी का नहीं, बल्कि समय रहते सतर्कता बरतने का भी है।”

मानसून की दस्तक से पहले क्षेत्र में संभावित बाढ़ के खतरे को लेकर चिंताएं गहराने लगी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्यास नदी में मिलने वाली 10 से 12 छोटी-बड़ी खड्डों के जल प्रवाह को बाढ़ के आकलन में पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता, जबकि भारी वर्षा के दौरान इन खड्डों का अतिरिक्त पानी हालात को और अधिक गंभीर बना सकता है।

दूसरी ओर, बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड) ने स्पष्ट किया है कि पौंग बांध का संचालन निर्धारित नियमों एवं वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप किया जाता है। बोर्ड के अनुसार जल निकासी से जुड़े सभी निर्णय तकनीकी विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर लिए जाते हैं तथा बाढ़ के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से चरणबद्ध तरीके से पानी छोड़ा जाता है।

इस बीच, अरनी विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित विभागों को सौंपे गए ज्ञापनों में बाढ़ सुरक्षा उपायों, नदी प्रबंधन व्यवस्था और क्षेत्र में जारी खनन गतिविधियों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

अरनी विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. विवेक सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का भय या भ्रम फैलाना नहीं है, बल्कि संभावित जोखिमों को देखते हुए समय रहते स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

मानसून सत्र के नजदीक आते ही अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन, बीबीएमबी तथा संबंधित एजेंसियों की आगामी कार्यवाही पर टिकी हुई हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाने से संभावित बाढ़ के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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