बिलासपुर (Shimla )क्राइम रिपोर्टर Vijay Samyal
कहते हैं कि लोभ बुरी बला है। धन-दौलत, नौकरी और सामाजिक प्रतिष्ठा होने के बावजूद नशे की लत इंसान को ऐसे अंधे कुएं में धकेल देती है, जहां से लौटना मुश्किल हो जाता है। एक बार फिर ऐसा ही मामला बिलासपुर में सामने आया है, जिसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि नशे की पूर्ति के लिए व्यक्ति किस हद तक गिर सकता है।
नशे के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बिलासपुर पुलिस ने बिजली बोर्ड के एक कर्मचारी को 1.2 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान सुरेंद्र कुमार निवासी बागी बिनौला के रूप में हुई है, जो विद्युत बोर्ड मंडल बिलासपुर कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर कार्यरत है।
पुलिस के अनुसार गश्त के दौरान धौलरा क्षेत्र में एक वाहन की तलाशी लेने पर आरोपी के कब्जे से 1.2 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
हैरानी की बात यह है कि सुरेंद्र कुमार पिछले पांच महीनों में दूसरी बार चिट्टे के साथ पकड़ा गया है। इससे पहले 11 जनवरी को भी उसे पुलिस विभाग के एक जवान के साथ सुंगल क्षेत्र में 2.85 ग्राम चिट्टा सहित गिरफ्तार किया गया था। उस समय विद्युत बोर्ड प्रशासन ने आरोपी को निलंबित करने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन वह अभी तक स्वीकृत नहीं हो पाया।
अब दूसरी बार गिरफ्तारी के बाद विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। विद्युत बोर्ड मंडल बिलासपुर के अधीक्षण अभियंता गौरव शर्मा ने बताया कि पूर्व में भेजा गया निलंबन प्रस्ताव लंबित है, लेकिन इस बार आरोपी कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिव चौधरी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले की गहन जांच जारी है।
क्राइम रिपोर्टर की नजर
नशे की गिरफ्त अब समाज के हर तबके तक पहुंच चुकी है। सरकारी नौकरी, नियमित आय और सामाजिक सम्मान भी यदि किसी व्यक्ति को नशे से दूर नहीं रख पा रहे, तो यह केवल कानून व्यवस्था ही नहीं बल्कि सामाजिक चेतना के लिए भी गंभीर चुनौती है। सवाल यह है कि बार-बार पकड़े जाने के बावजूद ऐसे लोगों पर समय रहते प्रभावी विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं हो पाती? यही ढिलाई कहीं न कहीं नशे के कारोबार और उसकी खपत को बढ़ावा देने का कारण बन रही है।

