Reading: ग्रामीण पत्रकारिता का चेहरा, अनसुने मुद्दों को दी आवाज़ 25 हजार से अधिक खबरें, 8 हजार वीडियो और जनसेवा को समर्पित जीवन सिरमौर रत्न’ से सम्मानित पत्रकार जयप्रकाश की प्रेरक कहानी

ग्रामीण पत्रकारिता का चेहरा, अनसुने मुद्दों को दी आवाज़ 25 हजार से अधिक खबरें, 8 हजार वीडियो और जनसेवा को समर्पित जीवन सिरमौर रत्न’ से सम्मानित पत्रकार जयप्रकाश की प्रेरक कहानी

RamParkash Vats
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संगहडा / 16 जून 2026चीफ़ ब्यूरो कपिल शर्मा (सिरमौर)।

सिरमौर की वादियों से निकली एक ऐसी आवाज़, जिसने कलम को हथियार और पत्रकारिता को जनसेवा का माध्यम बनाया। यह कहानी है संगड़ाह क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार जयप्रकाश की, जिन्होंने पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का मिशन बनाया।वर्ष 2001 में पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले जयप्रकाश अब तक 25 हजार से अधिक समाचार और लेख विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों, वेबसाइटों तथा चैनलों के लिए लिख चुके हैं। वहीं 8 हजार से अधिक वीडियो समाचार डिजिटल और सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से प्रसारित कर चुके हैं।दिव्य हिमाचल, हिमाचल दस्तक, पंजाब केसरी, जेपी न्यूज संगड़ाह और पब्लिक एप जैसे संस्थानों से जुड़े रहने के बावजूद उन्होंने अपने ग्रामीण क्षेत्र से कभी नाता नहीं तोड़ा।

उनकी रिपोर्टिंग में हमेशा गांव की धड़कन, जनसरोकारों की गूंज और पहाड़ का दर्द झलकता रहा।करीब 22 वर्ष पूर्व उन्हें पांवटा साहिब में एक बड़े समाचार पत्र का ब्यूरो बनाया गया। बेहतर भविष्य और करियर की संभावनाओं के बावजूद उन्होंने अपनी जन्मभूमि और ग्रामीण समाज की सेवा को प्राथमिकता दी और वापस अपने क्षेत्र लौट आए।गिरिपार की लोक परंपराएं, माघी पर्व, गुगा वल, बुड़ेछू और गुर्जरों के प्रवास जैसे विषयों को पहली बार मुख्यधारा की पत्रकारिता में प्रमुखता से स्थान दिलाने का श्रेय भी उन्हें जाता है। अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणविद किंकरी देवी की उपेक्षा और उनकी स्मृति को संरक्षित करने जैसे मुद्दों को भी उन्होंने मजबूती से उठाया।

संगड़ाह में डिग्री कॉलेज, एसडीएम कार्यालय और डीएसपी कार्यालय की मांगों को लगातार प्रमुखता देने का परिणाम रहा कि ये संस्थान क्षेत्र को मिले। वर्तमान में भी वे क्षेत्र में 100 बिस्तरों वाले अस्पताल, सिविल कोर्ट, फायर स्टेशन, राष्ट्रीय राजमार्ग तथा बिजली विभाग के एक्सईएन और एसडीओ कार्यालयों की बहाली के लिए लगातार आवाज़ उठा रहे हैं। डुंगी गांव से संगड़ाह तक पैदल चलकर समाचार संकलन करना कभी उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पत्रकारिता को कमाई का साधन नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम माना।

16 जून 1977 को जन्मे जयप्रकाश दो बेटियों के पिता हैं। सोशल मीडिया और संगड़ाह में संचालित छोटे से साइबर कैफे के माध्यम से वे परिवार का जीवन-यापन करते हैं तथा लोगों को सस्ती डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। उनकी कर्मनिष्ठा, निष्पक्ष पत्रकारिता और ग्रामीण जनसरोकारों के प्रति समर्पण को देखते हुए वर्ष 2024 में उन्हें प्रतिष्ठित “सिरमौर रत्न पत्रकारिता पुरस्कार” से सम्मानित किया गया।आज जयप्रकाश केवल एक पत्रकार नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज की आवाज़, जनहित के प्रहरी और पत्रकारिता में समर्पण की मिसाल बन चुके हैं।

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