महमूदाबाद ,सीतापुर:राज्य चीफ ब्यूरो अनुज कुमार जैन
नगर के बस स्टॉप के समीप यात्रियों को मार्ग संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाए गए दिशा-सूचक (मार्गदर्शक) साइन बोर्ड के क्षतिग्रस्त होने के बाद संबंधित विभाग की उदासीनता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि सार्वजनिक सुविधा के लिए निर्धारित स्थान पर टूटे हुए साइन बोर्ड को दुरुस्त कराने या नया बोर्ड लगाने के बजाय वहां एक निजी शैक्षणिक संस्थान एसआरजीआई (SRGI) के प्रचार-प्रसार से जुड़ा फ्लैक्स लगा दिया गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मार्गदर्शक साइन बोर्ड बाहरी यात्रियों, वाहन चालकों और आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण सूचना का माध्यम होते हैं। इनकी सहायता से लोगों को विभिन्न मार्गों, प्रमुख स्थलों और दूरी की सही जानकारी मिलती है। ऐसे में यदि इन बोर्डों की जगह निजी विज्ञापन सामग्री प्रदर्शित की जाती है, तो यह सीधे तौर पर जनसुविधाओं की अनदेखी माना जाएगा।
बताया जा रहा है कि संबंधित दिशा-सूचक बोर्ड काफी समय पहले क्षतिग्रस्त हो गया था और इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने भी आई थी। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग ने न तो बोर्ड की मरम्मत कराई और न ही उसे दोबारा स्थापित करने की पहल की। अब उसी स्थान पर निजी संस्थान का प्रचार बोर्ड लगाए जाने से विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित स्थानों की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है? यदि संबंधित विभाग नियमित निरीक्षण कर रहा होता, तो न केवल क्षतिग्रस्त बोर्ड को समय रहते बदला जा सकता था, बल्कि सार्वजनिक स्थल पर निजी प्रचार सामग्री लगाए जाने की स्थिति भी उत्पन्न नहीं होती।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह फ्लैक्स किसी प्रभावशाली व्यक्ति या जनप्रतिनिधि से जुड़े संस्थान का भी हो, तब भी सार्वजनिक सुविधाओं से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। यात्रियों की सुविधा से जुड़े दिशा-सूचक बोर्डों का रखरखाव संबंधित विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही आम जनता को सीधे प्रभावित करती है।
नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि टूटे हुए मार्गदर्शक बोर्ड को बदलने में आखिर इतनी देरी क्यों हुई तथा उसकी जगह निजी प्रचार सामग्री लगाने की अनुमति किस आधार पर दी गई। साथ ही बस स्टॉप और प्रमुख चौराहों पर लगे सभी सूचना बोर्डों का निरीक्षण कर उन्हें दुरुस्त कराया जाए, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
जनता का कहना है कि सरकारी संसाधनों और सार्वजनिक स्थलों का उपयोग जनहित के लिए होना चाहिए, न कि निजी प्रचार के माध्यम के रूप में। यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई है, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल यह मामला महज एक टूटे हुए बोर्ड का नहीं, बल्कि जनसुविधाओं के प्रति जिम्मेदार विभागों की संवेदनशीलता और जवाबदेही का भी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेते हुए यात्रियों की सुविधा बहाल करने की दिशा में क्या कदम उठाता है।

