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ज्वाली विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक Neeraj Bharti की ड्रग एब्यूज़ स्क्रीनिंग की दूसरी रिपोर्ट भी नेगेटिव आने के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। इससे पहले आई रिपोर्ट में भी कोई नकारात्मक संकेत नहीं मिलने की बात सामने आई थी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर रही और विभिन्न दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।
अब दूसरी रिपोर्ट के नेगेटिव आने के बाद मामला नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। समर्थकों का मानना है कि लगातार दो रिपोर्टों के परिणामों ने उन आरोपों और धारणाओं पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं, जो पिछले दिनों राजनीतिक मंचों और जनसभाओं में चर्चा का विषय बने हुए थे। वहीं, विरोधी पक्ष इस मामले में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले पूरी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करने की बात कर रहा है।
गौरतलब है कि इस पूरे विवाद के दौरान “नशेड़ी” शब्द को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गरमाया रहा। अब लगातार सामने आई नेगेटिव रिपोर्टों के बाद समर्थक इसे नीरज भारती की सार्वजनिक छवि के लिए राहत मान रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि जनता के बीच बनाई गई नकारात्मक अवधारणाओं को झटका लगा है। कई समर्थकों का यह भी कहना है कि इस राजनीतिक इम्तिहान से वह “कुंदन बनकर” निकले हैं और जनता के बीच फैले भ्रम काफी हद तक दूर हुए हैं।
हालांकि, मामले में तीसरी रिपोर्ट का इंतजार अभी बाकी है और राजनीतिक हलकों की नजरें अब आने वाले निष्कर्ष पर टिकी हुई हैं। अंतिम रिपोर्ट के बाद ही इस पूरे विवाद पर अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
ड्रग एब्यूज़ स्क्रीन (Drug Abuse Screen) क्या है?
ड्रग एब्यूज़ स्क्रीन या ड्रग स्क्रीनिंग टेस्ट एक चिकित्सीय (Medical) जांच होती है, जिसके माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि किसी व्यक्ति ने नशीले पदार्थ (Drugs/Narcotics) का सेवन किया है या नहीं। इस परीक्षण में शरीर के नमूनों जैसे मूत्र (Urine), रक्त (Blood), लार (Saliva), बाल (Hair) या कभी-कभी पसीने की जांच की जाती है। इसका उद्देश्य शरीर में मौजूद नशीले तत्वों (Substances) की पहचान करना होता है।
किन-किन नशीले पदार्थों की जांच होती है?
ड्रग स्क्रीन में सामान्यतः निम्न पदार्थों की जांच की जाती है—
गांजा / कैनाबिस (THC)–हेरोइन, मॉर्फीन, अफीम (Opioids)–कोकीन (Cocaine)—एम्फेटामाइन / मेथाम्फेटामाइन—चिट्टा / स्मैक (Heroin derivatives)—बेंजो डायजेपाइन (कुछ नशीली दवाएं)—सिंथेटिक ड्रग्स—कुछ मामलों में शराब (Alcohol) की भी जांच की जाती है।
ड्रग एब्यूज़ स्क्रीन क्यों करवाया जाता है?
- कानूनी या पुलिस जांच में
यदि किसी व्यक्ति पर नशा करने या नशीले पदार्थों के सेवन का संदेह हो, सड़क दुर्घटना, विवाद, अपराध या सार्वजनिक आरोप के मामलों में यह जांच करवाई जा सकती है। - चिकित्सीय कारणों से
डॉक्टर तब यह टेस्ट करवाते हैं जब मरीज में नशे की लत, मानसिक बदलाव, बेहोशी, असामान्य व्यवहार या जहरीले प्रभावों के संकेत दिखें। - नौकरी या भर्ती प्रक्रिया में
कुछ सरकारी, सुरक्षा, सेना, पुलिस, परिवहन या निजी संस्थानों में नियुक्ति से पहले ड्रग टेस्ट अनिवार्य हो सकता है। - खेल प्रतियोगिताओं में
खिलाड़ियों का डोप या ड्रग टेस्ट यह सुनिश्चित करने के लिए होता है कि उन्होंने प्रतिबंधित पदार्थों का उपयोग नहीं किया। - नशा मुक्ति केंद्रों में निगरानी हेतु
पुनर्वास (Rehabilitation) के दौरान यह जांच की जाती है कि व्यक्ति ने दोबारा नशा शुरू तो नहीं किया।
यह जांच कैसे होती है?
1. यूरिन टेस्ट (Urine Test)
सबसे सामान्य और कम खर्चीला तरीका। कई प्रकार के ड्रग्स कुछ दिनों तक मूत्र में पकड़ में आ जाते हैं।
2. ब्लड टेस्ट (Blood Test)
रक्त जांच से हाल ही में किए गए सेवन का अधिक सटीक पता चलता है, लेकिन यह अपेक्षाकृत महंगी होती है।
3. हेयर टेस्ट (Hair Test)
बालों के जरिए कई महीनों पहले तक के नशे का इतिहास पता लगाया जा सकता है।
4. सलाइवा टेस्ट (Saliva Test)
लार की जांच से हाल ही में किए गए सेवन का पता चलता है।
रिपोर्ट कैसे समझी जाती है?
Negative (नेगेटिव): शरीर में जांचे गए नशीले पदार्थ नहीं मिले।–Positive (पॉजिटिव): किसी नशीले पदार्थ के अंश मिले हैं।–कभी-कभी False Positive भी हो सकता है, यानी कुछ दवाइयों के कारण रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है, इसलिए पुष्टि के लिए दूसरी उन्नत जांच (Confirmatory Test) करवाई जाती है।
क्या नेगेटिव रिपोर्ट का मतलब हमेशा “नशा नहीं किया” होता है?
जरूरी नहीं। कुछ पदार्थ सीमित समय तक ही शरीर में दिखाई देते हैं। यदि सेवन बहुत पहले किया गया हो, या पदार्थ शरीर से निकल चुका हो, तो रिपोर्ट नेगेटिव आ सकती है। इसलिए समय, प्रकार और जांच पद्धति महत्वपूर्ण होती है।
क्या ड्रग स्क्रीन कानूनी प्रमाण है?
कई मामलों में प्रारंभिक स्क्रीनिंग केवल संकेत देती है। कानूनी मामलों में अक्सर कन्फर्मेटरी लैब टेस्ट (जैसे GC-MS) कराया जाता है, जिसे अधिक विश्वसनीय माना जाता है।
, ड्रग एब्यूज़ स्क्रीन एक वैज्ञानिक जांच है जिसका उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि किसी व्यक्ति ने नशीले पदार्थों का सेवन किया है या नहीं। इसे स्वास्थ्य, कानून, खेल, भर्ती और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे कई कारणों से करवाया जाता है।

