महमूदाबाद (सीतापुर)।राज्य चीफ ब्यूरो-अनुज कुमार जैन
महमूदाबाद नगर ने रविवार को अपने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया, जिनकी उपस्थिति केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि संस्कार, सरलता और सामाजिक सौहार्द की पहचान बन चुकी थी। नगर के सबसे बुजुर्ग माने जाने वाले वरिष्ठ समाजसेवी एवं प्रतिष्ठित व्यापारी कपूरचंद जैन का रविवार प्रातः लगभग 3 बजे निधन हो गया। वह लगभग 100 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे नगर में शोक और भावनात्मक उदासी की लहर दौड़ गई।कपूरचंद जैन केवल एक व्यापारी नहीं थे, बल्कि विनम्रता, मिलनसारिता और मृदुभाषी व्यवहार की सजीव मिसाल थे। नगर का शायद ही कोई व्यक्ति होगा, जिसने उनके स्नेह, सहजता और आत्मीय व्यवहार को महसूस न किया हो। उनकी बातचीत में अपनापन और व्यक्तित्व में ऐसी गरिमा थी, जो हर वर्ग के लोगों को सहज रूप से उनसे जोड़ देती थी। वह सदैव लोगों को सम्मान देना और समाज में सद्भाव बनाए रखने की सीख देते रहे।

स्वर्गीय शिखर चन्द्र जैन के तीन पुत्रों में सबसे बड़े कपूरचंद जैन ने अपने जीवन को केवल परिवार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सामाजिक और धार्मिक कार्यों में भी अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने अपने कर्म और व्यवहार से यह सिद्ध किया कि समाज सेवा केवल बड़े मंचों पर नहीं, बल्कि छोटे-छोटे मानवीय व्यवहारों में भी झलकती है।जीवन के अंतिम पड़ाव में भी उनकी सक्रियता प्रेरणादायक रही। बढ़ती उम्र के बावजूद नियमित रूप से दुकान के गल्ले पर बैठकर हिसाब-किताब करना उनके अनुशासन, कर्मनिष्ठा और आत्मनिर्भरता का प्रमाण था। नगर के लोग अक्सर उनकी सादगी और जीवटता का उदाहरण देते थे।
कपूरचंद जैन अपने परिवार की चौथी पीढ़ी तक को देखने वाले सौभाग्यशाली व्यक्तित्व थे। परिवार के प्रति उनका स्नेह और सामाजिक मूल्यों के प्रति समर्पण लोगों के लिए अनुकरणीय बना रहेगा। लोकतंत्र के प्रति उनकी सजगता भी उल्लेखनीय रही—99 वर्ष की आयु में स्वयं मतदान केंद्र पहुंचकर उन्होंने नागरिक जिम्मेदारी का प्रेरक संदेश दिया।रमुवापुर स्थित मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। नगरवासियों के लिए उनका निधन केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि एक ऐसे युग का अवसान है, जिसने सादगी, संस्कार और मानवीय संवेदनाओं को जीकर दिखाया। उनकी स्मृतियां लंबे समय तक नगरवासियों के हृदय में जीवित रहेंगी।

