आंसू बहता हैंडपम्प
रिपोर्टर राम प्रकाश वत्स
उपमंडल ज्वाली के अंतर्गत ग्राम पंचायत नरगाला में खड़ा एक हैंडपंप सिर्फ लोहे का ढांचा नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं की नाकामी का जीता-जागता सबूत बन चुका है। यह हैंडपंप आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है, लेकिन इसे देखने, सुधारने या इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। यह स्थिति केवल एक गांव या एक पंचायत की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पोल खोलती है।

हिमाचल सरकार ने बड़े-बड़े दावे करते हुए गांवों में पेयजल संकट से जूझ रही जनता के लिए हैंडपंप लगाने की योजना शुरू की थी। पंचायतों की मांग पर करोड़ों रुपये खर्च कर ये हैंडपंप लगाए गए, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल हैंडपंप लगाना ही सरकार की जिम्मेदारी पूरी कर देता है? जमीनी हकीकत तो इससे बिल्कुल उलट है। आंकड़े बताते हैं कि इस योजना के तहत लगाए गए करीब 70 प्रतिशत हैंडपंप या तो बंद पड़े हैं या पूरी तरह लावारिस हालत में खड़े हैं।

नरगाला पंचायत का यह हैंडपंप इसी लापरवाही का एक छोटा सा उदाहरण है। यह हैंडपंप किसी उपयोगी स्थान पर न लगाकर ऐसे स्थान पर खड़ा कर दिया गया, जहां न तो लोगों की पहुंच आसान है और न ही इसका रखरखाव संभव हो पाया। परिणाम यह हुआ कि यह कुछ ही समय में खराब होकर बेकार हो गया। आज इसकी हालत यह है कि इसके चारों ओर झाड़ियां, घास और जंगली पौधे उग आए हैं, जो इस पर ‘चार चांद’ नहीं बल्कि सरकारी लापरवाही का काला धब्बा साबित हो रहे हैं।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सरकार योजनाएं तो बनाती है, लेकिन उन योजनाओं को सफल बनाने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं करती। रखरखाव, निगरानी और जवाबदेही जैसी बुनियादी बातें कागजों तक सीमित रह जाती हैं। नतीजा यह होता है कि करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए जाते हैं और आम जनता को उसका कोई लाभ नहीं मिलता। यह सीधा-सीधा प्रदेश के राजस्व का दुरुपयोग है, जिसकी भरपाई अंततः आम जनता को ही टैक्स के रूप में करनी पड़ती है।

जल विभाग और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी इस मामले में सवालों के घेरे में है। क्या उन्होंने कभी यह देखने की कोशिश की कि लगाए गए हैंडपंप काम कर रहे हैं या नहीं? क्या किसी ने यह जानने की जहमत उठाई कि गलत स्थान पर लगाए गए हैंडपंप जनता के किस काम आ रहे हैं? जवाब साफ है—नहीं।
यह सिर्फ नरगाला का मामला नहीं है, बल्कि हजारों हैंडपंप इसी तरह अपनी बदहाली की कहानी कह रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि योजना बनाना आसान है, लेकिन उसे जमीन पर उतारना और टिकाऊ बनाना ही असली चुनौती है, जिसमें सरकार पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
अब समय आ गया है कि प्रशासन और सरकार इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लें। नरगाला पंचायत के इस हैंडपंप को तुरंत दुरुस्त कर चालू किया जाए और पूरे क्षेत्र में बंद पड़े अन्य हैंडपंपों की भी जांच कर उन्हें पुनः कार्यशील बनाया जाए। वरना यह लापरवाही आने वाले समय में और भी बड़े संकट को जन्म देगी, जिसकी कीमत फिर से आम जनता को ही चुकानी पड़ेगी।

