महमूदाबाद में संविदा कर्मियों का दर्द: “जब वेतन नहीं मिलेगा तो घर का चूल्हा कैसे जलेगा?”
महमूदाबाद, सीतापुर16 April 2026,राज्य चीफ ब्यूरो अनुज कुमार जैन
महमूदाबाद में संविदा कर्मियों का दर्द: “जब वेतन नहीं मिलेगा तो घर का चूल्हा कैसे जलेगा?”
महमूदाबाद, सीतापुर से सामने आ रही यह खबर केवल एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि पूरे तंत्र पर सवाल खड़े करने वाली गंभीर स्थिति है। नगर पालिका परिषद महमूदाबाद में कार्यरत संविदा सफाई कर्मचारियों का गुस्सा अब फूट पड़ा है। उनका सीधा और बेहद साधारण सा सवाल है—“जब वेतन ही नहीं मिलेगा, तो घर में चूल्हा कैसे जलेगा?”
यह सवाल केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों की पीड़ा है, जो अपनी रोजी-रोटी के लिए इन नौकरियों पर निर्भर हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें महीनों से वेतन नहीं मिला है। वहीं, वर्ष 2011 से लेकर 2026 तक उनके वेतन से भविष्य निधि (पीएफ) के नाम पर कटौती तो लगातार की गई, लेकिन वह राशि आज तक उनके खातों में जमा नहीं हुई। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यह पैसा गया कहां? और जो ब्याज इन वर्षों में बनता रहा, वह किसके खाते में जाएगा?
कर्मचारियों का कहना है कि कोई भी कर्मचारी शौक से हड़ताल नहीं करता। हड़ताल करना उनकी मजबूरी बन जाती है, जब बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं होती। कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। अब स्थिति यह है कि कर्मचारियों के बैंक खाते तक सीज कर दिए गए हैं, जिससे उनकी आर्थिक हालत और भी खराब हो गई है। परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं।
यह केवल आर्थिक शोषण नहीं, बल्कि मानसिक प्रताड़ना भी है। जिन कर्मचारियों के भरोसे शहर की सफाई व्यवस्था चलती है, उन्हीं के साथ ऐसा व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। एक ओर सरकार स्वच्छता और विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को उनका हक तक नहीं मिल रहा।
कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि एक महिला कर्मचारी की सेवा समाप्त हुए पांच वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन उसका भुगतान आज तक नहीं किया गया। यह घटना विभागीय लापरवाही और संवेदनहीनता को उजागर करती है।
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार से आम जनता को काफी उम्मीदें हैं। लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की नाक के नीचे इस तरह का शोषण हो रहा है, जो बेहद चिंताजनक है। यदि समय रहते इस पर संज्ञान नहीं लिया गया, तो यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है।

