बाल कवि

RamParkash Vats
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महमूदाबाद की प्यारी शाम,
गूँज उठा कविता का धाम।
माँ संकटा देवी के आँगन में,
खिला बाल प्रतिभाओं का नाम।

छोटे-छोटे स्वर, बड़े इरादे,
शब्दों में सजे सुनहरे धागे।
कभी देशभक्ति की गूँज उठी,
कभी हास्य के लगे थे आगे। 🇮🇳

सरस्वती वंदना से आरंभ हुआ,
मंच पर उजियारा छा गया।
नन्हें कवियों की मीठी वाणी,
सुन हर श्रोता मुस्का गया।

किसी ने ओज की ज्योति जलाई,
किसी ने भावों की धारा बहाई।
तालियों की गड़गड़ाहट में,
हर प्रस्तुति ने जीत दिलाई।

दीप जले तो खुशियाँ आईं,
अतिथियों ने सराहना पाई।
बाल प्रतिभाओं को सम्मान मिला,
मंच पर नई कहानी छाई। 🪔

बच्चों का उत्साह निराला,
हर चेहरा लग रहा था मतवाला।
कविता की इस सुंदर रात ने,
भर दिया दिलों में उजियाला।

गुरुवार फिर मेला सज जाएगा,
संकटा धाम जगमगाएगा।
आरती के बाद बजेगा आल्हा,
नेहा की स्वर-धारा आएगी निराला।

आतिशबाज़ी रंग बिखेरेगी,
रात सितारों सी निखरेगी।
महमूदाबाद की इस मस्ती में,
हर दिल खुशियों से भरेगी।

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