महमूदाबाद, सीतापुर 01/04/2026 अनुज कुमार जैन राज्य चीफ ब्यूरो
महमूदाबाद, सीतापुर स्थित माँ संकटा देवी मंदिर के सांस्कृतिक मंच पर आयोजित अखिल भारतीय बाल कवि सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि भारतीय काव्य परंपरा की मशाल अब नई पीढ़ी के हाथों में सुरक्षित है। मंगलवार रात बच्चों द्वारा प्रस्तुत कविताओं ने न केवल श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि यह भी साबित किया कि साहित्यिक संस्कार बचपन से ही विकसित किए जाएं तो समाज को संवेदनशील दिशा मिलती है।

मेला महोत्सव के अंतर्गत गुरुवार को संकटा धाम में आरती के बाद रात 8 बजे आल्हा गायिका नेहा सिंह की प्रस्तुति तथा आकर्षक आतिशबाजी का आयोजन प्रस्तावित है। यह कार्यक्रम सांस्कृतिक श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय जनमानस को लोक परंपरा से जोड़ने का अवसर देगा।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई, जो भारतीय सांस्कृतिक आयोजनों की परंपरा को मजबूत करती है। इसके बाद बाल कवियों ने देश के प्रतिष्ठित कवियों की रचनाओं को सधे हुए अंदाज में प्रस्तुत किया। देशभक्ति, ओज, हास्य और भावनात्मक अभिव्यक्तियों ने वातावरण को बहुरंगी बना दिया। बच्चों की आवाज में जब राष्ट्रप्रेम, संवेदना और हास्य का समन्वय सुनाई देता है, तो यह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक शिक्षा का जीवंत उदाहरण बन जाता है।

ऐसे आयोजन ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में प्रतिभाओं को मंच देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। बड़े शहरों से दूर रहने वाले बच्चों को जब सार्वजनिक मंच मिलता है, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और साहित्य के प्रति लगाव भी मजबूत होता है। अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन और बाल प्रतिभाओं का सम्मान इस बात का संकेत है कि समाज इन नवांकुरों को पहचान देने के लिए तैयार है। दर्शकों की बड़ी उपस्थिति भी यह बताती है कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रति जनरुचि आज भी जीवित है।

इन आयोजनों का एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि वे पीढ़ियों के बीच संवाद का पुल बनते हैं। वरिष्ठ कवियों की रचनाएं जब बच्चों की आवाज में सुनाई देती हैं, तो साहित्य की परंपरा निरंतरता प्राप्त करती है। इससे भाषा, संवेदना और संस्कृति का संरक्षण स्वाभाविक रूप से होता है।

सारतः, बाल कवि सम्मेलन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि साहित्यिक चेतना के बीजारोपण का प्रयास है। यदि ऐसे मंच नियमित रूप से आयोजित होते रहें, तो आने वाले समय में कविता और संस्कृति दोनों को नई ऊर्जा मिलती रहेगी।

