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सस्ती दवा की दुकानों की गुणवत्ता पर मुख्यमंत्री का बयान — चिंता, तथ्य और समाधान

RamParkash Vats
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NEWS INDIA AAJ TAK EDITOR RAM PARKASH VATS

मुख्यमंत्री का कहना है कि सस्ती दवा दुकानों पर मिलने वाली दवाओं से अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा, लोग अधिक गोलियां लेने के बावजूद पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं हो पा रहे। उन्होंने इंग्लैंड में अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ बुखार में केवल तीन पैरासिटामोल लेने से राहत मिल गई, जबकि यहाँ कई बार अधिक दवाएँ लेने के बावजूद आराम नहीं मिलता। यह तुलना सीधे तौर पर दवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर प्रश्न खड़ा करती है।

यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी अस्पतालों में खुली सस्ती दवा दुकानों का उद्देश्य आम जनता को कम कीमत पर दवा उपलब्ध कराना है। गरीब और मध्यम वर्ग के मरीज इन्हीं दुकानों पर निर्भर रहते हैं। यदि इन दवाओं की गुणवत्ता पर संदेह उत्पन्न होता है, तो यह केवल स्वास्थ्य सेवा पर भरोसे को कमजोर नहीं करता, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन जाता है।

हालांकि इस विषय पर संतुलित दृष्टिकोण भी आवश्यक है। भारत में दवा निर्माण और वितरण एक सख्त नियामक प्रणाली के अंतर्गत होता है। जेनेरिक दवाएँ ब्रांडेड दवाओं की तुलना में सस्ती होती हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वे कम गुणवत्ता वाली हों। कई बार दवा की प्रभावशीलता रोग की स्थिति, मरीज की शारीरिक प्रकृति, सही डोज, और डॉक्टर की सलाह पर भी निर्भर करती है। इसलिए यह मान लेना कि सभी सस्ती दवाएँ कम प्रभावी हैं, उचित नहीं होगा।

फिर भी मुख्यमंत्री द्वारा उठाया गया सवाल पूरी तरह निराधार भी नहीं कहा जा सकता। दवा खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता, गुणवत्ता परीक्षण, बैच-टू-बैच जांच, और समय-समय पर स्वतंत्र लैब से परीक्षण जैसे कदम अनिवार्य हैं। यदि सरकारी खरीद केवल कम कीमत के आधार पर होती है और गुणवत्ता नियंत्रण मजबूत नहीं है, तो समस्या उत्पन्न हो सकती है।

सरकार की जिम्मेदारी है कि सस्ती दवा दुकानों के लिए स्पष्ट गुणवत्ता मानक तय किए जाएँ। प्रत्येक दवा की प्रभावशीलता और शुद्धता का परीक्षण हो, दवा कंपनियों का चयन सख्त मापदंडों पर किया जाए, और अस्पताल स्तर पर निगरानी प्रणाली मजबूत की जाए। साथ ही, डॉक्टरों और फार्मासिस्टों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि मरीजों को सही दवा, सही मात्रा और सही अवधि के लिए दी जाए।

मुख्यमंत्री का यह बयान स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में चेतावनी भी है और अवसर भी। यदि सरकार इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाती है, तो इससे न केवल सस्ती दवा दुकानों पर जनता का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी सुधरेगी।

अंततः यह स्पष्ट है कि सस्ती दवाएँ उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है उनकी गुणवत्ता और प्रभावशीलता। जनता को कम कीमत पर ऐसी दवा मिले जो जल्दी और पूर्ण रूप से लाभ दे — यही एक संवेदनशील, जिम्मेदार और दूरदर्शी शासन की पहचान है। मुख्यमंत्री का यह बयान इसी दिशा में एक गंभीर पहल माना जाना चाहिए।

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