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पेट्रोल-डीजल महंगाई की मार: हिमाचल में बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई आम आदमी की चिंता

RamParkash Vats
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शिमला/स्टेट चीफ ब्यूरो विजय समयाल
वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर अब हिमाचल प्रदेश की सड़कों और बाजारों में दिखाई देने लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक झटके में करीब तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि ने आम जनता, परिवहन क्षेत्र और व्यापारिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ा दिया है। राजधानी शिमला सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में तेल की नई दरें लागू होने के बाद महंगाई की नई लहर उठने की आशंका तेज हो गई है।
राजधानी शिमला में पेट्रोल अब 98.31 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है, जबकि डीजल 90.27 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़कर 106.96 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं। इससे पहले पेट्रोल 95.17 रुपये और डीजल 87.16 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था। यानी एक ही बार में तीन रुपये से अधिक की बढ़ोतरी ने वाहन चालकों का बजट बिगाड़ दिया है।
कुल्लू में भी हालात अलग नहीं हैं। यहां पेट्रोल 98.31 रुपये और डीजल 90.18 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुका है। स्थानीय टैक्सी चालकों, ऑटो संचालकों और निजी वाहन मालिकों ने तेल की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि कीमतों में इसी तरह इजाफा जारी रहा तो परिवहन किरायों में वृद्धि करना मजबूरी बन जाएगा, जिसका असर सीधे आम जनता की जेब पर पड़ेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि तेल की बढ़ती कीमतें केवल वाहन ईंधन तक सीमित नहीं रहेंगी। मालभाड़ा बढ़ने से सब्जियों, राशन, निर्माण सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दामों में भी उछाल देखने को मिल सकता है। पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल प्रदेश पहले ही परिवहन लागत के दबाव से जूझता है, ऐसे में ईंधन महंगाई प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।
इसी बीच राज्य सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर अतिरिक्त सेस लगाने की तैयारी ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विधानसभा बजट सत्र में पारित संशोधित विधेयक के तहत अनाथ और विधवा कल्याण योजनाओं के लिए अधिकतम पांच रुपये तक सेस लगाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि सेस की दर कितनी होगी और इसे कब से लागू किया जाएगा।
आबकारी एवं कर विभाग द्वारा जिला अधिकारियों को अधिसूचना जारी किए जाने के बाद यह संकेत जरूर मिल गए हैं कि आने वाले समय में ईंधन और महंगा हो सकता है। आबकारी आयुक्त यूनुस ने कहा है कि सरकार के निर्देशों के अनुसार आगामी निर्णय लिया जाएगा।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह मुद्दा आने वाले समय में सरकार के लिए चुनौती बन सकता है। महंगाई हमेशा से जनभावनाओं को प्रभावित करने वाला विषय रही है और हिमाचल जैसे मध्यम आय वर्ग वाले प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़े कर सकती है। जनता फिलहाल राहत की उम्मीद लगाए बैठी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेत फिलहाल राहत देने वाले नजर नहीं आ रहे।

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