Reading: धारावाहिक भारत के स्वतंत्र सैनानी (61) पंडित शिवानंद रमौल — सिरमौर के स्वतंत्रता सेनानी

धारावाहिक भारत के स्वतंत्र सैनानी (61) पंडित शिवानंद रमौल — सिरमौर के स्वतंत्रता सेनानी

RamParkash Vats
4 Min Read

भारत के स्वतंत्र सैनानीयों को कोटि-कोटि नमन संपादक राम प्रकाश वत्स

पंडित शिवानंद रमौल (1894–1972) हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी और राजनेता थे। उन्होंने सिरमौर रियासत में प्रजामंडल आंदोलन का नेतृत्व करते हुए जनता को अधिकारों के प्रति जागरूक किया। उनका जीवन संघर्ष, त्याग और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। वे स्वतंत्रता संग्राम के साथ-साथ स्वतंत्र भारत की राजनीतिक व्यवस्था को मजबूत करने वाले अग्रणी नेताओं में गिने जाते हैं।पंडित शिवानंद रमौल का जन्म 16 अक्टूबर 1894 को सिरमौर जिले के भरोग बनेड़ी पंचायत के खैना गांव में हुआ।

उनका बचपन साधारण ग्रामीण वातावरण में बीता, परंतु शिक्षा के प्रति उनकी गहरी रुचि थी। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त की और आगे चलकर नाहन के शमशेर हाई स्कूल से 1915 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। उस समय पहाड़ी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा बहुत दुर्लभ थी, इसलिए उनकी यह उपलब्धि विशेष मानी जाती है। शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने सिरमौर रियासत में नायब जेलर के पद पर नौकरी शुरू की, किंतु रियासती शासन की कठोरता और अन्यायपूर्ण नीतियों से वे संतुष्ट नहीं हुए।

अंततः 1921 में उन्होंने सरकारी नौकरी त्यागकर जनसेवा और स्वतंत्रता आंदोलन का मार्ग अपनाया।महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर पंडित रमौल ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लेना शुरू किया। 1930 से 1945 तक उन्होंने विभिन्न आंदोलनों में भाग लिया और जनता को संगठित करने का कार्य किया। उन्होंने दिल्ली में गढ़देश सेवा संघ तथा सिरमौर एसोसिएशन में कार्य किया।

बाद में सिरमौर प्रजामंडल की स्थापना में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस संगठन ने रियासत में लोकतांत्रिक अधिकारों, प्रतिनिधि शासन और जनता की भागीदारी की मांग उठाई। उनके नेतृत्व में प्रजामंडल आंदोलन मजबूत हुआ और लोगों में राजनीतिक चेतना जागृत हुई।स्वतंत्रता के बाद भी पंडित शिवानंद रमौल ने जनसेवा का कार्य जारी रखा। 1948 में उन्होंने सिरमौर प्रजामंडल आंदोलन को संगठित किया और हिमालयन प्रोविजनल गवर्नमेंट के अध्यक्ष बने।

इसके बाद वे हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चुने गए। उन्हें हिमाचल प्रदेश विधानसभा का पहला प्रोटेम स्पीकर बनने का सम्मान भी प्राप्त हुआ। 1952 में वे पांवटा क्षेत्र से पहले विधायक बने और जनता की समस्याओं को विधानसभा में उठाया। 1959 में शिमला संसदीय क्षेत्र से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए और 1962 से 1968 तक राज्यसभा के सदस्य रहे।

इस दौरान उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों के विकास, सड़क, शिक्षा और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया।पंडित शिवानंद रमौल का निधन 22 जनवरी 1972 को नाहन में हुआ। उन्होंने अपने जीवन का हर क्षण जनता की सेवा और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए समर्पित किया।

सिरमौर और हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वे उन नेताओं में थे जिन्होंने रियासती शासन से लोकतांत्रिक व्यवस्था तक के संक्रमण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज भी उन्हें सिरमौर के जननायक और हिमाचल के स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सम्मानपूर्वक याद किया जा

Share This Article
Leave a comment
error: Content is protected !!