शिमला, न्यूज इंडिया आजतक,राज्य चीफ ब्यूरो विजय समयाल
नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रहे हिमाचल प्रदेश का “एंटी चिट्टा मॉडल” अब राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी रणनीति के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है। प्रदेश सरकार, पुलिस, खुफिया एजेंसियों और प्रशासनिक तंत्र द्वारा संयुक्त रूप से चलाए गए इस व्यापक अभियान ने न केवल चिट्टा तस्करी पर शिकंजा कसने में सफलता हासिल की है, बल्कि सामाजिक पुनर्वास और आर्थिक कार्रवाई को जोड़कर एक बहुआयामी मॉडल भी प्रस्तुत किया है। यही कारण है कि अब Narcotics Control Bureau (एनसीबी) के क्षेत्रीय कार्यालय ने हिमाचल प्रदेश से इस मॉडल का विस्तृत प्रारूप और कार्यप्रणाली मांगी है, ताकि इसके अध्ययन के बाद देश के अन्य राज्यों में भी इसे लागू करने की संभावनाएं तलाश की जा सकें।

सूत्रों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बनकर उभरा है जहां पंचायत स्तर तक नशे के प्रभाव की वैज्ञानिक और प्रशासनिक मैपिंग की गई। प्रदेशभर की पंचायतों को चिट्टा प्रभाव के आधार पर रेड, येलो और ग्रीन श्रेणियों में विभाजित किया गया। सर्वेक्षण में 234 पंचायतों को अत्यधिक संवेदनशील मानते हुए रेड जोन में रखा गया। इन क्षेत्रों में पुलिस निगरानी, खुफिया तंत्र, जनजागरूकता और विशेष अभियानों को एक साथ संचालित किया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।
प्रदेश में लागू इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता केवल गिरफ्तारी आधारित कार्रवाई तक सीमित न रहकर आर्थिक नेटवर्क पर सीधा प्रहार करना माना जा रहा है। पिट-एनडीपीएस एक्ट के तहत अब तक 174 आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है। वहीं नशा कारोबार से अर्जित लगभग 51 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों को जब्त कर बड़ा संदेश देने का प्रयास किया गया है। जांच एजेंसियों ने 700 से अधिक मामलों की पड़ताल की, जिनमें करीब 300 मामलों को आर्थिक जांच और संपत्ति कुर्की के लिए उपयुक्त पाया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल का यह मॉडल पारंपरिक पुलिस कार्रवाई से आगे बढ़कर “सप्लाई चेन तोड़ने” और “आर्थिक कमर तोड़ने” की रणनीति पर आधारित है। यही वजह है कि राष्ट्रीय एजेंसियां भी इस पहल को गंभीरता से देख रही हैं। माना जा रहा है कि यदि यह मॉडल अन्य राज्यों में लागू होता है तो नशा तस्करी के खिलाफ देशव्यापी अभियान को नई दिशा मिल सकती है।
सरकार ने इस अभियान को केवल दमनात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा है। नशे की गिरफ्त में आए युवाओं के पुनर्वास को भी नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। प्रदेश में नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों के मानकीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। Kotla Barog में आधुनिक सुविधाओं से युक्त पुनर्वास केंद्र स्थापित किया जा रहा है, जबकि Mashobra और Dr. Rajendra Prasad Government Medical College में भी नए पुनर्वास केंद्र शुरू करने की तैयारी चल रही है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि हिमाचल प्रदेश का यह “एंटी चिट्टा मॉडल” आने वाले समय में राष्ट्रीय एंटी-नारकोटिक्स नीति के लिए एक संदर्भ मॉडल बन सकता है। प्रदेश ने जिस तरह पंचायत स्तर की भागीदारी, आर्थिक कार्रवाई, खुफिया निगरानी और पुनर्वास को एक साथ जोड़कर अभियान को जमीन पर उतारा है, उसने देशभर की एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

