राजकीय प्राथमिक पाठशाला प्रेम नगर के दोनों अध्यापक मायाराम शर्मा व सुश्री सृष्टि शर्मा ने निभाया बच्चों से किया वादा वार्षिक परीक्षा के दौरान दोनों अध्यापकों ने बच्चों से यह वादा किया था जो बच्चे पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करेंगे उनको अध्यापकों की तरफ से ब्लेजर (कोट) प्रदान किये जाएंगे
NEWS INDIA AAJ TAK, HEAD OFFICE BHARMAR EDITOR RAM PARKASH VATS
“जैसा राजा, वैसी प्रजा” यह कहावत समाज में नेतृत्व की भूमिका को स्पष्ट करती है। जिस प्रकार राजा का आचरण प्रजा के जीवन को दिशा देता है, उसी प्रकार विद्यालय में शिक्षक बच्चों के भविष्य का निर्माता होता है। यदि शिक्षक बच्चों को तराशने वाला, प्रेरणा देने वाला और उनके विकास के लिए समर्पित हो, तो वही शिक्षक बच्चों के लिए भगवान के समान बन जाता है। राजकीय प्राथमिक पाठशाला प्रेम नगर के दोनों अध्यापक मायाराम शर्मा और सुश्री सृष्टि शर्मा ने अपने कार्यों से इस कहावत को साकार कर दिखाया है।
वार्षिक परीक्षा के दौरान दोनों अध्यापकों ने बच्चों से एक प्रेरणादायक वादा किया था कि जो विद्यार्थी पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करेंगे, उन्हें अध्यापकों की ओर से ब्लेजर (कोट) प्रदान किए जाएंगे। यह वादा केवल एक घोषणा नहीं था, बल्कि बच्चों को प्रोत्साहित करने का एक सशक्त माध्यम था। बच्चों ने भी इस वादे को चुनौती के रूप में लिया और पढ़ाई में अधिक मेहनत की। इससे विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण सकारात्मक और प्रतिस्पर्धात्मक बन गया।
अध्यापिका सुश्री सृष्टि शर्मा के सुझाव के अनुसार बच्चों को ब्लेजर उपलब्ध करवाना एक नया और सराहनीय प्रयास था। उनका मानना था कि बच्चों का मनोबल बढ़ाने और उन्हें सम्मान का अनुभव कराने के लिए इस प्रकार के प्रयास आवश्यक हैं। इस सोच को आगे बढ़ाते हुए दोनों अध्यापकों ने अपनी ऐच्छिक निधि से बच्चों को ब्लेजर उपलब्ध करवाए। जब बच्चों ने ब्लेजर पहने, तो उनके चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था।
पाठशाला प्रबंधन समिति ने भी इस नेक कार्य में सहयोग करते हुए बच्चों को टी-शर्ट उपलब्ध करवाई। विद्यालय द्वारा निजी विद्यालयों की तर्ज पर अनेक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इनमें ट्रैकसूट, टी-शर्ट, जूते, जुराबें, स्वेटर, स्कूल बैग, पानी की बोतल, खाने की थाली और अब ब्लेजर व शर्ट भी शामिल हैं। सरकारी विद्यालय में इतनी सुविधाएं मुफ्त में मिलने से बच्चों और अभिभावकों का विश्वास बढ़ रहा है।
इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव विद्यालय के नामांकन पर भी पड़ा है। विद्यालय की छात्र संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है और अभिभावक अब सरकारी विद्यालय की ओर आकर्षित हो रहे हैं। बच्चों का मनोबल बढ़ने से वे पढ़ाई में भी रुचि ले रहे हैं। ब्लेजर पहनकर बच्चे गर्व और खुशी का अनुभव कर रहे थे, जो उनके आत्मविश्वास को दर्शाता है।
इस अवसर पर विद्यालय में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि उच्च विद्यालय लझोगड़ी के प्रधानाचार्य श्री ताराचंद जी और केंद्रीय मुख्य शिक्षिका श्रीमती सरोज बालाजी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अध्यापिका सुश्री सृष्टि शर्मा ने किया। पाठशाला प्रभारी मायाराम शर्मा ने मुख्य अतिथि और उपस्थित सभी लोगों का स्वागत व अभिनंदन किया।

मुख्य अतिथि श्री ताराचंद जी ने अपने संबोधन में बच्चों को सच्चाई का रास्ता अपनाने, माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छे संस्कार भी उतने ही जरूरी हैं। केंद्रीय मुख्य शिक्षिका श्रीमती सरोज बालाजी ने विद्यालय में हो रहे अच्छे कार्यों की सराहना की और गुणात्मक शिक्षा पर जोर देने का संदेश दिया।

विद्यालय में हो रहे इन सराहनीय कार्यों में पाठशाला प्रबंधन समिति का भी विशेष योगदान रहा है। समिति के सहयोग से बच्चों के लिए नई-नई सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इस कार्यक्रम में माध्यमिक विद्यालय प्रभारी भविंद्र सिंह, टीजीटी नॉन मेडिकल अंशु कुमारी, शास्त्री श्री जगत राम, प्राथमिक विद्यालय प्रभारी मायाराम शर्मा, अध्यापिका सुश्री सृष्टि शर्मा तथा पाठशाला प्रबंधन समिति की अध्यक्षा श्रीमती मंजू बाला सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।

विद्यालय की ओर से एमडीएम के दोनों कार्यकर्ताओं को भी ड्रेस कोड के तहत दो सूट प्रदान किए गए। विद्यालय में अधिकृत रूप से ड्रेस कोड लागू किया गया है और सभी के लिए ब्लू कलर का ड्रेस तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहल विद्यालय में अनुशासन और समानता का संदेश देती है।

अंत में माध्यमिक पाठशाला प्रभारी श्री भविंद्र सिंह ने सभी का धन्यवाद किया और उपस्थित सभी लोगों को भोजन करवाया गया। इस पूरे कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि यदि शिक्षक समर्पित हो, तो सरकारी विद्यालय भी निजी विद्यालयों से कम नहीं होते। वास्तव में, ऐसे शिक्षक ही बच्चों के जीवन को संवारते हैं और उनके लिए भगवान के समान बन जाते हैं।

