हिमाचल में न्यूनतम दिहाड़ी 450 रुपये, मानदेय कर्मियों को भी बड़ी राहत
सुक्खू की घोषणाएं: दिहाड़ी बढ़ी, आंगनबाड़ी-आशा सहित कई श्रेणियों का मानदेय बढ़ा
शिमला/21 मार्च 2026/ राज्य ब्यूरो चीफ विजय समयाल
विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश के दिहाड़ीदारों, मानदेय कर्मियों और पेंशनरों को राहत देने वाली कई घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में न्यूनतम दिहाड़ी बढ़ाकर 450 रुपये की जाएगी। साथ ही अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी तथा कर्मचारियों की ग्रेच्युटी का भुगतान भी सुनिश्चित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पेंशनरों को लंबित वकाया राशि का भुगतान वित्त वर्ष 2026-27 में किया जाएगा। वहीं विधायक प्राथमिकता योजनाओं की सीमा 225 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। विधायक क्षेत्र विकास निधि को 2 करोड़ 20 लाख रुपये से घटाकर 1 करोड़ 20 लाख रुपये प्रति विधानसभा क्षेत्र किया गया है।
सरकार ने विभिन्न मानदेय आधारित कर्मचारियों के भत्तों में भी बढ़ोतरी की घोषणा की। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 1000 रुपये की वृद्धि करते हुए इसे 11,500 रुपये प्रतिमाह किया गया है। मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाकर 8,300 रुपये तथा आंगनबाड़ी सहायिकाओं और आशा वर्करों का मानदेय 6,800 रुपये प्रतिमाह किया गया है। सिलाई शिक्षकों के मानदेय में भी 1000 रुपये की बढ़ोतरी की जाएगी।
मिड-डे मील वर्करों को 500 रुपये की वृद्धि के साथ 5,500 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। शिक्षा विभाग के जल वाहकों का मानदेय बढ़ाकर 6,000 रुपये तथा जल रक्षकों का 6,100 रुपये किया गया है। जल शक्ति विभाग के बहुउद्देशीय कार्यकर्ताओं को 6,000 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। लोक निर्माण विभाग के मल्टी टास्क वर्करों को भी 500 रुपये मासिक बढ़ोतरी दी गई है।
पैरा फिटर और पंप ऑपरेटर का मानदेय बढ़ाकर 7,100 रुपये किया गया है। पंचायत चौकीदार को 9,000 रुपये, राजस्व चौकीदार को 6,800 रुपये तथा राजस्व लंबरदार को 5,000 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। एसएमसी अध्यापकों, आईटी शिक्षकों, एसपीओ तथा अंशकालिक मल्टी टास्क वर्करों के मानदेय में भी 500 रुपये मासिक बढ़ोतरी की घोषणा की गई है।
स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न श्रेणियों के मानदेय कर्मियों को भी राहत देते हुए सरकार ने उनके भत्तों में वृद्धि का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन फैसलों से निचले स्तर के कर्मचारियों को आर्थिक संबल मिलेगा और उनकी कार्यक्षमता में भी सुधार आएगा।

