भारत के स्वतंत्र सैनानीयों को कोटि कोटि नमन लेखक संपादक राम प्रकाश बत्स
भारत के स्वतंत्रता संग्राम की उज्ज्वल गाथा मेंबाबा खड़ग सिंह का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है।सत्य, साहस और त्याग की ज्योति लेकर,उन्होंने परतंत्रता की बेड़ियों से राष्ट्र को मुक्त करने का संकल्प लिया।

जन-जन के हृदय में स्वतंत्रता का दीप जलाया,और संघर्ष की राह पर अडिग रहकर इतिहास रचा।
छह जून अठारह सौ सड़सठ को सियालकोट की धरती पर जन्मे,समृद्ध परिवार में पले, पर जीवन राष्ट्र को समर्पित किया।
पंजाब विश्वविद्यालय लाहौर से शिक्षा का उजियारा पाया,
किन्तु पिता के निधन पर घर का दायित्व निभाया।
विद्या, विवेक और राष्ट्रभक्ति का संगम बनकर,उन्होंने जीवन का लक्ष्य स्वतंत्रता का पथ चुना।जलियांवाला बाग की पीड़ा ने हृदय को झकझोर दिया,अन्याय के विरुद्ध उन्होंने विद्रोह का शंखनाद किया।केंद्रीय सिख लीग का नेतृत्व संभाल,अंग्रेजी शासन को खुली चुनौती दी।जनता के अधिकारों की रक्षा हेतु,उन्होंने संघर्ष की मशाल थाम ली।
स्वर्ण मंदिर की चाबियों का वह ऐतिहासिक मोर्चा,उनके साहस का अमिट उदाहरण बन गया।अंग्रेजी सत्ता के आगे न झुके, न डिगे,जनबल से अधिकार पुनः प्राप्त कर लिया।
असहयोग आंदोलन में गांधीजी के साथ कदम मिलाया,
स्वाधीनता के लिए स्वयं को पूर्णतः समर्पित कर दिया।
बार-बार जेल की यातनाएं सहकर भी,उनकी दृढ़ता कभी कम न हुई।
लगभग पंद्रह बार कारावास का जीवन जिया,पर राष्ट्रभक्ति की लौ सदा प्रज्वलित रही।त्याग, तपस्या और बलिदान का यह जीवन,देशभक्ति का अनुपम आदर्श बन गया।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के प्रथम अध्यक्ष बनकर,
उन्होंने सुधार की नई दिशा दिखाई।
धर्म और समाज में जागृति का संदेश दिया,शिक्षा के प्रसार का दीप जलाया।सिख समाज के उत्थान हेतु निरंतर प्रयास कर,
एक नई चेतना का संचार किया।अटूट देशसेवा और निर्भीक व्यक्तित्व के कारण,जनता ने उन्हें “बेताज बादशाह” की उपाधि दी।
उनकी स्मृति में राजधानी की राह भी अमर हुई,बाबा खड़क सिंह मार्ग उनका सम्मान बन गया।आज भी उनका जीवन प्रेरणा का दीप है,जो स्वतंत्रता के अर्थ को उजागर करता है।बाबा खड़ग सिंह का संघर्षमय जीवन संदेश देता है—देशभक्ति केवल शब्द नहीं, संकल्प है।त्याग, साहस और सत्य की राह पर चलकर,राष्ट्र गौरव की रक्षा करना धर्म है।
स्वतंत्रता के इस अमर सेनानी को शत-शत नमन,
भारतभूमि का यह वीर सदा अमर रहेगा।

