सोमवार से सामान्य चर्चा, 30 मार्च को पारित होगा बजट; विधायक निधि में कटौती के संकेत- मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुख्खू
शिमला/21 मार्च 2026/ राज्य ब्यूरो चीफ विजय समयाल
हिमाचल प्रदेश की विधानसभा में प्रस्तुत होने जा रहे वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर इस बार पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू अपने कार्यकाल का चौथा बजट पेश करेंगे, ऐसे में सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों, किसानों-बागवानों, पर्यटन कारोबारियों, व्यापारियों और उद्योग जगत को इस बजट से खास उम्मीदें हैं।
राज्य की आर्थिक स्थिति इस बार बजट का केंद्रीय विषय बनी हुई है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश पर चढ़ा लगभग एक लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके साथ ही कर्मचारियों और पेंशनरों की देनदारियां, विकास योजनाओं के लिए संसाधन जुटाना और राजस्व घाटे की भरपाई जैसे मुद्दे भी सरकार की वित्तीय रणनीति की परीक्षा लेंगे। बतौर वित्त मंत्री मुख्यमंत्री सुक्खू के वित्तीय प्रबंधन पर भी राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की पैनी नजर है।
सूत्रों के अनुसार सरकार वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता देते हुए कुछ सख्त फैसले ले सकती है। इनमें विधायक क्षेत्र विकास निधि में कटौती जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं। यह संकेत सरकार की खर्च नियंत्रण नीति को दर्शाते हैं, क्योंकि केंद्र सरकार की ओर से राजस्व घाटा अनुदान बंद होने का असर इस बजट में साफ दिखाई देना तय माना जा रहा है।
विधानसभा में मुख्यमंत्री का बजट भाषण सुबह 11 बजे शुरू होगा। बजट पेश होने के बाद सोमवार से सामान्य चर्चा आरंभ होगी, जो 25 मार्च तक चलेगी। इसके बाद 27 मार्च से बजट की मांगों पर चर्चा और मतदान की प्रक्रिया शुरू होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 30 मार्च को बजट पारित कर दिया जाएगा।
बताया जा रहा है कि बजट अनुमानों में चालू वित्त वर्ष की तुलना में बहुत अधिक वृद्धि की संभावना नहीं है। संसाधनों की सीमित उपलब्धता को देखते हुए सरकार संतुलित बजट पेश करने की तैयारी में है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने बजट भाषण को अंतिम रूप देने के लिए शुक्रवार दोपहर ओक ओवर शिमला में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लंबी बैठक की।
बैठक में मुख्य सचिव संजय गुप्ता, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बजट भाषण के हर बिंदु पर विस्तार से चर्चा की गई, ताकि सीमित संसाधनों के बीच विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाया जा सके।
अब देखना यह है कि कर्ज के दबाव और घटते राजस्व के बीच सरकार किस तरह राहत और अनुशासन का संतुलन साधती है। सोमवार से शुरू होने वाली चर्चा में विपक्ष भी सरकार के वित्तीय प्रबंधन को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी में है, जिससे विधानसभा में बजट पर बहस के तीखे होने के संकेत मिल रहे हैं।

