शिमला/21 मार्च 2026 राज्य ब्यूरो चीफ विजय समयाल
हिमाचल प्रदेश सरकार ने पर्यटन को रोजगार, पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए कई अहम घोषणाएं की हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में वीकेंड टूरिज्म को बढ़ावा देकर छोटे कस्बों और गांवों तक पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाई जाएगी, जिससे स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि हो सके। इसी दिशा में होम-स्टे मालिकों को पर्यावरण अनुकूल प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि पर्यटन विकास प्रकृति के संतुलन के साथ आगे बढ़े।
स्नो टूरिज्म को नई पहचान देने के लिए 40 गांवों को स्नो टूरिज्म स्पॉट घोषित करने का निर्णय लिया गया है। इससे सर्दियों में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी। महिलाओं की सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा को ध्यान में रखते हुए ‘शी ट्रैवल पोर्टल’ शुरू किया जाएगा। वहीं सोलन और मंडी में कारवां पार्क बनाए जाने से रोड ट्रिप और एडवेंचर पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा।
धार्मिक पर्यटन को भी नई ऊर्जा देने की योजना बनाई गई है। श्री ज्वालाजी और श्री नैना देवी जी के विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही होटल पीटरहॉफ और होटल हमीर के पुनर्निर्माण से विरासत पर्यटन को मजबूती मिलेगी। सरकार का उद्देश्य है कि आस्था, प्रकृति और आधुनिक सुविधाओं का संतुलित समन्वय तैयार किया जाए। 🛕✨
पर्यटन क्षेत्र को व्यवस्थित करने के लिए पीपीपी आधार पर पर्यटन पंजीकरण सिस्टम लागू किया जाएगा। पर्यटन से जुड़े युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण संस्थान स्थापित होगा। 345 लाख रुपये की लागत से विकासात्मक कार्य किए जाएंगे। एडवेंचर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए माउंटेन बाइकिंग रूट चयनित किए जाएंगे, जबकि कांगड़ा एयरपोर्ट के पास एरोसिटी बसाने की योजना क्षेत्रीय विकास को गति देगी।
परिवहन सुविधाओं को मजबूत करते हुए दिल्ली–शिमला–धर्मशाला फ्लाइट सेवा शुरू करने की घोषणा की गई है। साथ ही सभी जिला मुख्यालयों को हेलीपोर्ट से जोड़ने की योजना भी पर्यटन के विस्तार में अहम भूमिका निभाएगी। इससे दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी और निवेश के नए अवसर खुलेंगे। ✈️
सरकार ने पर्यटन के साथ-साथ पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी ध्यान दिया है। 100 नई ट्राउट इकाइयों की स्थापना से मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलेगा। वर्ष 2030 तक हरित क्षेत्र को 29.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 32 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। 2026-27 में चार हजार हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण किया जाएगा।
हमीरपुर में 25 करोड़ रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क बनाया जाएगा। 50 ईको टूरिज्म साइट विकसित होंगी और 50 विश्राम गृहों की बुकिंग ऑनलाइन की जाएगी। कृषि सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री खेत बाड़बंदी योजना हेतु 10 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है।
इन घोषणाओं से स्पष्ट है कि सरकार पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास से जोड़कर व्यापक आर्थिक मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हिमाचल के पहाड़ अब सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि योजनाबद्ध पर्यटन विकास की नई कहानी भी कहेंगे। 🌄
वीकेंड टूरिज्म से धार्मिक पर्यटन तक: हिमाचल को नई पर्यटन पहचान देने की तैयारी
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