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भाजपा का अनुशासनात्मक प्रहार: पार्टी उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले 28 पदाधिकारी पदमुक्त, हिमाचल में बागियों पर सख्त कार्रवाई से संगठन में मचा राजनीतिक हलचल

RamParkash Vats
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शिमला/स्टेट चीफ़ ब्यूरो VIJASY SAMYAL:

हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं, विशेषकर जिला परिषद चुनावों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक अनुशासन को सर्वोपरि रखते हुए बड़ा राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है। पार्टी के नियमों को ताक पर रखकर अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनावी दंगल में उतरने वाले 28 पदाधिकारियों पर भाजपा ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटा दिया है।भाजपा नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि पार्टी द्वारा घोषित उम्मीदवारों के खिलाफ बगावती तेवर अपनाने, निर्दलीय मैदान में उतरने अथवा संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल होने वालों के लिए पार्टी में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। पंचायत चुनावों के बीच यह कार्रवाई राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।

सूत्रों के मुताबिक, संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ गहन मंथन और समीक्षा बैठक के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि चुनावों के दौरान भीतरघात और गुटबाजी संगठन को कमजोर करती है, इसलिए अनुशासनहीनता पर समय रहते कठोर कदम उठाना आवश्यक था।कार्रवाई की जद में कई प्रमुख पदाधिकारी भी आए हैं, जिनमें महिला मोर्चा की प्रदेश सोशल मीडिया सह-संयोजक सरिता वर्मा, युवा मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष देवांश चंदेल, प्रदेश सचिव रोहित ठाकुर और शहरी निकाय प्रकोष्ठ की प्रदेश सह-संयोजक वीना कपिल सहित विभिन्न जिलों और मंडलों के कई नेता शामिल बताए जा रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो पंचायत चुनावों के बीच भाजपा का यह कदम केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को एक स्पष्ट चेतावनी भी है कि पार्टी हितों से ऊपर व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को तरजीह देने वालों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त रुख जारी रहेगा।भाजपा के इस बड़े एक्शन ने यह साफ कर दिया है कि हिमाचल की राजनीति में चुनावी मौसम के दौरान अब संगठनात्मक अनुशासन की अनदेखी करना किसी भी नेता के लिए भारी पड़ सकता है।

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