मुख्यकार्यालय न्यूज़ इंडिया आजतक भरमाड़ (जवाली) संपादक राम प्रकाश बत्स
हिमालय की वादियों में सफर करना केवल दूरी तय करना नहीं होता, वह एक अनुभव होता है—पगडंडियों से लेकर पहाड़ी मोड़ों तक, हर रास्ता एक कहानी कहता है। पर अब इन कहानियों के साथ एक नया अध्याय जुड़ गया है। हिमाचल पथ परिवहन निगम यानी एचआरटीसी की बसों में रियायतों का आनंद लेने के लिए ‘हिम बस कार्ड’ अनिवार्य कर दिया गया है।
समय बदल रहा है, और उसके साथ बदल रही हैं व्यवस्थाएँ भी। कभी जेब में छूट का प्रमाण पत्र या पहचान पत्र काफी होता था, लेकिन अब डिजिटल पहचान ही आपकी सच्ची सहयात्री होगी। यह ‘हिम बस कार्ड’ केवल एक कार्ड नहीं, बल्कि तकनीक और सुविधा का संगम है—जो यात्रा को व्यवस्थित, पारदर्शी और सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
सरकार ने रियायती और मुफ्त यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दी है। यह मोहलत इसलिए दी गई है ताकि कोई भी पात्र नागरिक सुविधा से वंचित न रह जाए। पहाड़ों में बस केवल साधन नहीं, जीवनरेखा होती है—छात्रों के लिए शिक्षा का रास्ता, बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, और आमजन के लिए रोज़मर्रा की जरूरतों का माध्यम। ऐसे में यह समय-सीमा राहत का संदेश लेकर आई है।
लेकिन यह राहत स्थायी नहीं है। 1 अप्रैल 2026 से नियम कठोर हो जाएंगे। यदि आपके पास वैध ‘हिम बस कार्ड’ नहीं है, तो रियायत या मुफ्त यात्रा का अधिकार स्वतः समाप्त हो जाएगा। तब हर यात्री को सामान्य किराया अदा करना होगा। यह परिवर्तन अनुशासन और डिजिटल व्यवस्था की ओर एक निर्णायक कदम है।
कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस रखा गया है। अब घर बैठे ही आवेदन संभव है। बस आधिकारिक पोर्टल buspassonline.hrtchp.com पर जाकर आवश्यक जानकारी भरनी है। इंटरफेस को इस प्रकार बनाया गया है कि बुजुर्ग और कम तकनीकी ज्ञान रखने वाले लोग भी सहजता से आवेदन कर सकें।
यह बदलाव केवल नियमों का परिवर्तन नहीं, बल्कि सोच का परिवर्तन है—जहाँ सुविधा और तकनीक साथ-साथ चल रहे हैं। इसलिए अंतिम क्षण की भागदौड़ से बचें, समय रहते अपना पंजीकरण पूर्ण करें। क्योंकि अब हिमाचल की सड़कों पर रियायत का सफर डिजिटल पहचान के साथ ही संभव होगा।

