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चिट्टे के सौदागरों के लिए सख़्त चेतावनी, प्रदेशवासियों के लिए स्पष्ट संदेश–मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू

RamParkash Vats
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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने नशे के खिलाफ अपनी शून्य सहिष्णुता नीति को अमल में लाते हुए बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। चिट्टा तस्करी और एनडीपीएस एक्ट के मामलों में संलिप्त पाए गए 11 पुलिस कर्मियों को सोमवार को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। यह कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(बी) के तहत की गई है, जो यह साफ दर्शाती है कि कानून के रक्षक यदि कानून तोड़ेंगे तो उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।सरकार का यह फैसला न केवल नशों के सौदागरों के लिए कड़ा संदेश है, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी भी है कि नशे के कारोबार में संलिप्तता अब किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी। जिन पुलिस कर्मियों को बर्खास्त किया गया है, वे विभिन्न जिलों और बटालियनों में तैनात थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार कार्रवाई में किसी पद या प्रभाव को आड़े नहीं आने दे रही।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए दो टूक कहा कि चिट्टे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना पुलिस की जिम्मेदारी है। यदि पुलिस कर्मी ही इस अवैध धंधे में लिप्त पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिट्टा तस्करी और नशे के अवैध कारोबार से जुड़े किसी भी व्यक्ति—चाहे वह सरकारी कर्मचारी ही क्यों न हो—को बख्शा नहीं जाएगा।मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि चिट्टे से अर्जित संपत्ति की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी जाए। साथ ही, नशे के खिलाफ जनभागीदारी को मजबूत करने के लिए सूचना देने वालों के लिए आकर्षक इनामों की घोषणा की गई है। दो ग्राम से लेकर एक किलो से अधिक चिट्टे की सूचना पर 10 हजार से 10 लाख रुपये तक इनाम निर्धारित किया गया है। बड़े गिरोहों की जानकारी देने पर इससे भी अधिक इनाम दिया जाएगा।

प्रदेश सरकार ने नशे के खिलाफ लड़ाई में आम जनता को भागीदार बनाने के लिए 112 आपातकालीन नंबर पर सूचना देने की अपील की है। यह कदम स्पष्ट करता है कि नशा न केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा है, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर संकट है।सरकार की यह सख्त कार्रवाई प्रदेशवासियों को यह संदेश देती है कि नशे के खिलाफ लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है। यह समय है जब समाज, प्रशासन और नागरिक मिलकर नशे के इस जहर को जड़ से खत्म करने का संकल्प लें।

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