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संपादकीय:प्रतिनियुक्ति पर सख्ती से पारदर्शिता की ओर हिमाचल सरकार, ईमानदार कर्मचारियों को न्याय और स्थानांतरण व्यवस्था में बड़ा सुधार

RamParkash Vats
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Editorial Viewpoint: Brainstorming and Analysis, News India Aaj Tak. Chief Editor Ram Prakash Vats

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिनियुक्ति व्यवस्था को लेकर लिया गया ताज़ा निर्णय प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा सकता है। कर्मचारियों और अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति अवधि को अब मूल तैनाती में शामिल न किए जाने का निर्णय केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही उस व्यवस्था पर सख्त प्रहार है, जिसमें नियमों की आड़ में असमानता और अनुचित लाभ पनपते रहे हैं। मुख्य सचिव संजय गुप्ता द्वारा जारी निर्देश स्पष्ट संकेत देते हैं कि सरकार अब सेवा नियमों के पालन में किसी भी तरह की ढील के मूड में नहीं है।

प्रतिनियुक्ति को लेकर सबसे बड़ी समस्या उसकी अदृश्यता रही है। सेवा पुस्तिका में प्रविष्टि न होने के कारण कई अधिकारी काग़ज़ों में वर्षों तक एक ही स्टेशन पर तैनात दिखते रहे, जबकि व्यवहार में वे सुविधाजनक या प्रभावशाली पदों पर कार्यरत थे। इसका सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ा, जो वास्तव में कठिन, दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे थे। नीति के इस दुरुपयोग ने न केवल स्थानांतरण प्रणाली की विश्वसनीयता को कमजोर किया, बल्कि प्रशासनिक नैतिकता पर भी प्रश्नचिह्न खड़े किए।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के 26 नवंबर 2025 के आदेशों के अनुपालन में जारी ये निर्देश न्यायपालिका की उस भूमिका को भी रेखांकित करते हैं, जो प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने में निरंतर हस्तक्षेप करती रही है। विपिन कुमार गुलेरिया बनाम राज्य सरकार मामले में अदालत ने जिस विसंगति की ओर इशारा किया था, वह राज्य की स्थानांतरण नीति की मूल भावना के विरुद्ध थी। अब सरकार द्वारा प्रतिनियुक्ति की पूरी अवधि, स्थान और समय को सेवा पुस्तिका में दर्ज करना अनिवार्य करना, उसी विसंगति को दूर करने का प्रयास है।

यह निर्णय प्रशासनिक संतुलन के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण है। प्रतिनियुक्ति को मूल तैनाती से अलग गिनने से न केवल भविष्य के स्थानांतरण निष्पक्ष होंगे, बल्कि कठिन क्षेत्रों में कार्य करने वालों के साथ न्याय भी सुनिश्चित होगा। साथ ही, यह संदेश भी साफ है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारी या कर्मचारी अब जवाबदेही से नहीं बच पाएंगे। अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी इस सुधार को केवल काग़ज़ी न रहने देने का संकेत देती है।

कुल मिलाकर प्रतिनियुक्ति व्यवस्था में की गई यह सख्ती प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक ठोस और आवश्यक कदम है। पारदर्शिता, समान अवसर और नियम-आधारित शासन को प्राथमिकता देकर सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि अब व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं होगी। यदि इन निर्देशों का ईमानदारी से पालन किया गया, तो इससे न केवल स्थानांतरण नीति मजबूत होगी, बल्कि कर्मचारियों के बीच विश्वास, न्याय और जवाबदेही की भावना भी और अधिक सुदृढ़ होगी।

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