संदेश:
यह घटना सिर्फ एक पटवारी पर हमला नहीं, बल्कि ईमानदारी पर हमला है। यदि सच बोलने और नियमों के अनुसार काम करने वालों को सरेआम पीटा जाएगा, तो व्यवस्था की जड़ें कमजोर होंगी। कानून को डर से नहीं, कानून के डर से चलना चाहिए। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई ही यह संदेश दे सकती है कि रिश्वत, दबाव और हिंसा—तीनों का समाज में कोई स्थान नहीं है।
चंबा(Shimla) 04/01/2026/S.C.B. Vijay Samyal
कानून के रखवाले पर ही कानून तोड़ने का दबाव—और इनकार करने की सजा मारपीट। चंबा जिले के सिल्लाघराट पटवार सर्कल में जो हुआ, वह सिर्फ एक कर्मचारी पर हमला नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र को डराने की कोशिश है।
जानकारी के मुताबिक 2 जनवरी को पटवार सर्कल सिल्लाघराट में तैनात पटवारी मुकेश कुमार अपने सरकारी कर्तव्य का निर्वहन कर रहे थे। तभी गोरी राम, निवासी गांव भलोठ, कार्यालय पहुंचा और एक मामले में झूठी रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाने लगा। जब पटवारी ने नियम-कानून का हवाला देकर साफ इनकार किया, तो आरोपी ने खुलेआम रिश्वत की रकम मेज पर रख दी—मानो ईमानदारी को खरीदा जा सकता हो।
रिश्वत ठुकराना आरोपी को नागवार गुजरा। आरोप है कि गुस्से में आकर उसने पटवारी को सरकारी कुर्सी से घसीटते हुए कार्यालय से बाहर निकाल दिया और उसके साथ मारपीट की। इस हमले में पटवारी के कपड़े तक फट गए। शोर सुनकर जब चौकीदार बीच-बचाव के लिए आगे आया, तो उसे भी जान से मारने की धमकी दी गई। दफ्तर, जो कानून का प्रतीक होता है, कुछ देर के लिए गुंडागर्दी का अखाड़ा बन गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक चंबा विजय कुमार सकलानी ने बताया कि ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी पर हमला करने और रिश्वत देने के प्रयास को लेकर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की गहन जांच में जुटी है।

