जवाली,न्यूज़ इंडिया आजतक संपादक राम प्रकाश
ज्वाली में स्थित श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा साहिब में सिखों के दसवें पातशाह, साहिब-ए-कमाल श्री गुरु गोविन्द सिंह जी का 359वां पावन प्रकाशोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और गुरु मर्यादा के अनुरूप धार्मिक वातावरण में मनाया गया। यह दिवस केवल एक पर्व नहीं, बल्कि त्याग, बलिदान, साहस और मानवता की सेवा का जीवंत संदेश लेकर आया, जिसे संगतों ने हृदय से आत्मसात किया।प्रातःकाल गुरुद्वारा साहिब में रखे गए सहज पाठ का विधिवत भोग डाला गया।

इसके उपरांत स्थानीय कीर्तनी जत्थों द्वारा गुरुवाणी के मधुर शबद-कीर्तन की अमृतवाणी गूंजी, जिसने संगतों के मन को शांति, भक्ति और गुरु प्रेम से सराबोर कर दिया। “वाहेगुरु” के जयकारों से पूरा गुरुद्वारा परिसर निहाल हो उठा।इस पावन अवसर पर पठानकोट से पधारे प्रसिद्ध कीर्तनी जत्था भाई अमरीक सिंह ने अपने भावविभोर कर देने वाले कीर्तन के माध्यम से गुरु गोविन्द सिंह जी की महान जीवन-यात्रा, उनके अतुलनीय बलिदानों और धर्म की रक्षा हेतु किए गए सर्वस्व समर्पण को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
उन्होंने संगतों को गुरु साहिब द्वारा दिखाए गए सत्य, साहस, समानता और सेवा के मार्ग पर चलने का प्रेरक संदेश दिया।दोपहर उपरांत शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, अमृतसर से आए कथा वाचक भाई हरजिन्द्र सिंह ने गुरु गोविन्द सिंह जी की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि गुरु साहिब का जीवन केवल सिख समाज के लिए ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी कथा से संगतें भाव-विभोर हो उठीं और गुरु चरणों में नतमस्तक होकर निहाल हुईं।इस गुरुपर्व पर ज्वाली सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारा साहिब में शीश नवाकर गुरु साहिब का आशीर्वाद प्राप्त किया।

वातावरण में भाईचारे, समरसता और सेवा भावना की अनुपम छटा देखने को मिली।कार्यक्रम के समापन पर गुरु का अटूट लंगर बरताया गया, जिसमें बिना किसी भेदभाव के सभी संगतों ने पंगत में बैठकर लंगर ग्रहण किया। लंगर सेवा ने गुरु गोविन्द सिंह जी के उस महान संदेश को साकार किया, जिसमें समानता और सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है

इस पावन आयोजन में महिन्द्र सिंह, यशपाल सिंह, मुख्तियार सिंह, कुलदीप सिंह, गुरुदेव सिंह, भवनीत सिंह, मनदीप सिंह, हरमन सिंह, केहर सिंह, गुरुनाम सिंह, जसवीर सिंह, भूपिन्द्र सिंह (नगरोटा सूरियां), शशीपाल ठाकुर (DSP), सुभाष धवन, डॉ. जोगिन्दर सिंह, नवदीप सिंह (SDO), औंकार सिंह, प्रकाश चन्द, प्रीतम सिंह, जोगिन्दर रपोत्रा, बलवीर सिंह (XEN), अंग्रेज सिंह, हंसराज, गुरदीप सिंह, सहजप्रीत सिंह, तेजविन्द्र सिंह, जसविन्द्र सिंह, इकबाल सिंह, लखविन्द्र सिंह, नारायण सिंह, अवतार सिंह, डॉ. सुच्चा सिंह, डॉ. गगनदीप सिंह, त्रिशला सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों और श्रद्धालु संगतों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।समूचा आयोजन गुरु गोविन्द सिंह जी की शिक्षाओं—“देह शिवा बर मोहे इहै”—के भाव को चरितार्थ करता हुआ सेवा, श्रद्धा और समर्पण का अनुपम उदाहरण बना।

