Shimla /03/01/2026/S.C.B. Vijay Samyal
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मातृत्व अवकाश को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी महिला कर्मचारी के पहले दो बच्चों का जन्म सरकारी सेवा में आने से पहले हुआ हो, तो वह सरकारी सेवा के दौरान तीसरे बच्चे के जन्म पर भी मातृत्व अवकाश की हकदार होगी।
न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की एकल पीठ ने यह आदेश रीमा देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता एक नियमित सरकारी कर्मचारी हैं। उनके पहले दो बच्चों का जन्म सरकारी सेवा में नियुक्ति से पहले हुआ था, जबकि तीसरे बच्चे का जन्म 25 जुलाई 2025 को सेवा के दौरान हुआ।
जब याचिकाकर्ता ने मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया, तो संबंधित विभाग ने 6 नवंबर 2025 को यह कहते हुए उनका अनुरोध खारिज कर दिया कि सीसीएस (लीव) रूल्स, 1972 के नियम 43(1) के अनुसार दो से अधिक जीवित संतान होने पर मातृत्व अवकाश नहीं दिया जा सकता।
हाईकोर्ट ने विभाग के इस निर्णय को गलत ठहराते हुए कहा कि नियमों की व्याख्या याचिकाकर्ता के सेवा-काल के संदर्भ में की जानी चाहिए। चूंकि पहले दो बच्चों का जन्म सरकारी सेवा में आने से पूर्व हुआ था, इसलिए तीसरे बच्चे के जन्म पर मातृत्व अवकाश से इनकार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने सरकार और संबंधित विभाग को निर्देश दिए कि वे दो सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता के मातृत्व अवकाश के मामले पर पुनर्विचार कर निर्णय लें और आदेश से मिलने वाले सभी लाभ याचिकाकर्ता को प्रदान करें।
इस फैसले को महिला कर्मचारियों के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे सेवा में कार्यरत महिलाओं को मातृत्व संबंधी संरक्षण और सामाजिक न्याय को मजबूती मिलेगी।

