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लोकसभा में भारत-जी राम जी विधेयक 2025 पेश, ग्रामीण परिवारों को 125 दिन रोजगार गारंटी, डिजिटल निगरानी, ग्राम पंचायत केंद्रित योजना, जल सुरक्षा और अवसंरचना पर जोर, पारदर्शिता, जवाबदेही सुनिश्चित

RamParkash Vats
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ग्रामीण भारत को रोजगार और आजीविका की मजबूत गारंटी देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को लोकसभा में विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) की गारंटी: भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ प्रस्तुत किया। इस विधेयक के जरिए सरकार ने ग्रामीण परिवारों को हर वर्ष 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी देने का प्रस्ताव रखा है।

विधेयक को प्रस्तुत करते हुए मंत्री ने कहा कि यह कानून विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप एक नया, समग्र और भविष्य के लिए तैयार ग्रामीण विकास ढांचा तैयार करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लचीला बनाना है।

125 दिन का रोजगार, कानूनी हक:प्रस्तावित विधेयक के तहत वे सभी ग्रामीण परिवार, जिनके वयस्क सदस्य स्वेच्छा से अकुशल शारीरिक श्रम करना चाहते हैं, उन्हें प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिन का मजदूरी रोजगार प्रदान किया जाएगा। यदि 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो राज्य सरकारों कोबेरोजगारी भत्तादेना अनिवार्य होगा।

ग्राम पंचायत केंद्र में:इस विधेयक की एक प्रमुख विशेषता‘विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं’ (VGPP) हैं। सभी कार्यों की पहचान ग्राम पंचायत स्तर पर की जाएगी और इन्हें ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर समेकित किया जाएगा। इन योजनाओं कोपीएम गति शक्तिके साथ जोड़ा जाएगा, ताकि योजनाओं का बेहतर अभिसरण और संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित हो सके।

राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक: ग्रामीण सार्वजनिक कार्यों के लिए एक एकीकृत ढांचा तैयार करने के उद्देश्य सेविकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक’ की परिकल्पना की गई है। इसके अंतर्गत जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका से जुड़ी परिसंपत्तियां और चरम मौसम व आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

खेती के मौसम का भी ध्यान:विधेयक में कृषि चक्र को ध्यान में रखते हुए राज्यों को यह अधिकार दिया गया है कि वे वर्ष में अधिकतम60 दिनों की अवधि अग्रिम रूप से अधिसूचितकर सकें, जिनके दौरान कोई कार्य नहीं कराया जाएगा। इसका उद्देश्य बुवाई और कटाई के समय कृषि श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

केंद्र-राज्य साझेदारी: यह योजनाकेंद्र प्रायोजित योजना (CSS) के रूप में लागू होगी। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए90:10, जबकि अन्य राज्यों के लिए60:40 के अनुपात में वित्तीय साझेदारी होगी। राज्यों को छह माह के भीतर इस कानून को लागू करने के लिए अपनी कार्ययोजना तैयार करनी होगी।

पारदर्शिता और डिजिटल निगरानी: सरकार ने इस विधेयक मेंडिजिटल सार्वजनिक अवसंरचनाको अनिवार्य बनाया है। बायोमेट्रिक उपस्थिति, रियल-टाइम डैशबोर्ड, मोबाइल आधारित रिपोर्टिंग, एआई-सक्षम विश्लेषण और मजबूत सामाजिक लेखापरीक्षा जैसे प्रावधान शामिल हैं। ग्राम पंचायत भवनों मेंसाप्ताहिक सार्वजनिक सूचना बैठकेंआयोजित होंगी, जहां कार्यों, भुगतान और शिकायतों की जानकारी साझा की जाएगी।

ग्रामीण भारत के बदलते परिदृश्य का जवाब; सरकार का कहना है कि पिछले दो दशकों में ग्रामीण भारत में बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल पहुंच और आय के स्तर में बड़ा बदलाव आया है। ऐसे में मौजूदा जरूरतों और भविष्य की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए रोजगार गारंटी व्यवस्था को और सशक्त बनाना जरूरी हो गया था।कुल मिलाकर, भारत-जी राम जी विधेयक, 2025 को ग्रामीण भारत में रोजगार, अवसंरचना और आजीविका के नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जो गांवों को आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।

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