SHIMLA/12 DEC 2025/(NIAT )
परवाणू—साउथ ज़ोन जीएसटी विंग ने एक उच्चस्तरीय ऑपरेशन में 941.39 करोड़ रुपये के फर्जी कारोबार और टैक्स फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया है। विभागीय टीम ने समय रहते कार्रवाई करते हुए करीब 170 करोड़ रुपये की संभावित जीएसटी चोरी को रोक लिया, जिसे जीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 132, 122 और 67 के प्रावधानों के तहत गंभीर अपराध माना जाता है।
एआई-छेड़छाड़ किए दस्तावेज़ों से बनाया जाल
जांच में सामने आया कि आरोपी नेटवर्क ने फेसलेस जीएसटीआईएन पंजीकरण हासिल करने के लिए बिजली बिल, आधार कार्ड, पैन कार्ड, किरायानामा और ई-स्टांप पेपरों में एआई टूल्स से हेरफेर की थी। जीएसटी अधिनियम की धारा 132(1)(b) के अनुसार किसी भी प्रकार के झूठे दस्तावेज़ों का उपयोग करके रजिस्ट्रेशन लेना जेल और भारी जुर्माने की श्रेणी में आता है।चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन ई-स्टांप पेपरों का इस्तेमाल शिक्षक, डॉक्टर और सरकारी कर्मचारी अपने किरायानामे के लिए करते हैं, उन्हीं को एआई से बदलकर फर्जी व्यापारियों ने व्यावसायिक पता दिखाने में प्रयोग किया।
मकान मालिक और दस्तावेज़ धारक बेख़बर
विभागीय अनुसार, कई पते ऐसे मिले जिन्हें अनजान मकान मालिकों के नाम पर उपयोग किया गया। घर-मालिकों को छह महीनों से उनकी संपत्ति के पते पर हो रहे करोड़ों के कारोबार की कोई जानकारी तक नहीं थी।उसी तरह कई फर्जी रजिस्ट्रेशन सफाई कर्मियों, माली और घरेलू सहायकों के आधार नंबर और मोबाइल पर बनाए गए—जो आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) फ्रॉड की क्लासिक तकनीक मानी जाती है। यह सीधे-सीधे धारा 122(1)(xiv) के तहत दंडनीय अपराध है।
देशभर में फैला नेटवर्क – हिमाचल बना शेल-हब
अब तक पकड़े गए 9 फर्जी करदाताओं में 5 शिमला, 3 सोलन और 1 ऊना से जुड़े दिखाई दिए, लेकिन असल नेटवर्क तेलंगाना, राजस्थान और कर्नाटक में बैठा था। ये फर्जी व्यापारी हिमाचल से 90% बिक्री दक्षिणी राज्यों को दिखा रहे थे और वहीं के बैंक खातों का उपयोग कर रहे थे—जो धारा 67 के तहत तलाशी और जब्ती कार्रवाई की स्पष्ट आधार बनाता है।
कानूनी कार्रवाई: किस धारा के तहत गिरे शिकंजे में?
जीएसटी विंग ने जिन कानूनी धाराओं में कार्रवाई आगे बढ़ाई है, वे मुख्यतः—
धारा 67 – तलाशी, जब्ती और परिसर जांच—–धारा 122 – गलत जानकारी, फर्जी दस्तावेज़ और फर्जी पंजीकरण पर दंड ——-धारा 132 – धोखाधड़ी, फर्जी चालान, टैक्स चोरी पर गिरफ्तारी व कारावास——-धारा 16 व 17 – इनपुट टैक्स क्रेडिट के गलत उपयोग का अपराध I ऐसे मामलों में 5 साल तक की सजा और टैक्स रकम के बराबर जुर्माना लगाया जा सकता है।
फर्जी पंजीकरण पर कसेगा और शिकंजा
ज्वाइंट कमिश्नर जीडी ठाकुर ने साफ किया है कि यह ऑपरेशन केवल शुरुआत है। विभाग अब—हाई-रिस्क पंजीकरणों की AI assisted scrutiny—-ई-स्टांप व किरायानामा की क्रॉस-वेरिफिकेशन—–मोबाइल और आधार लिंकिंग की भौतिक पुष्टि
जैसे कदम तेज़ करने वाला है। उन्होंने कहा कि फर्जी जीएसटीआईएन पंजीकरणों पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए कठोर अभियानों की श्रृंखला जारी रहेगी।टैक्स चोरी का यह नेटवर्क हिमाचल को फ्रंट-स्टेट बनाकर चल रहा था, जबकि दिमाग और पैसा दक्षिणी राज्यों में घूम रहा था। यह मामला दिखाता है कि तकनीक के दुरुपयोग और चोरी के नए तरीकों से निपटने के लिए विभाग को अब कानूनी प्रावधानों के साथ साइबर-फॉरेंसिक जांच को और मजबूत करना होगा।

