उपमंडल जवाली में अभी खामोशी है… लेकिन ग्रामीणों के दिलों में एक ही सवाल गूंज रहा है—
आखिर कब तक हमारे मवेशी इन ‘मौत के गोलों’ का शिकार बनते रहेंगे?
ज्वाली न्यूज़ इंडिया आजतक संपादक राम प्रकाश Vats
जवाली थाना क्षेत्र के तहत पंचायत पनालथ के देहरी गांव में उस समय दहशत फैल गई, जब एक जर्जर पड़े मकान से हाथ से बनाए गए लड्डूनुमा विस्फोटक गोले बरामद हुए। इन गोलों के फटने से तीन गायों के जबड़े उड़ गए—वारदात की बर्बरता इतनी खौफनाक है कि 15 साल पहले धमेटा में घटी वही दर्दनाक घटना लोगों की आंखों के सामने घूमने लगी, जब जंगल में चरने गई गाय आटे में छिपाए गोले के धमाके का शिकार हुई थी।
घटना: दो दिन में तीन गायें छलनी, ग्रामीण सहमे
ग्राम पंचायत पनालथ के प्रधान रमेश चंद्र के अनुसार, दो दिन पहले पहली गाय की जबड़े उड़ने की खबर ने पूरे इलाके को दहलाकर रख दिया था। ग्रामीणों ने काफी छानबीन की, पर कारण का पता नहीं चला।बुधवार को सुबह फिर धमाके की आवाज आई—लोग दौड़ कर मौके पर पहुंचे तो दो और गायें खून से लथपथ मिलीं। जांच शुरू हुई तो पास ही स्थित एक पुराने, खंडहरनुमा मकान में छुपाकर रखे गए ‘लड्डू आकार के गोले’ बरामद हुए। ग्रामीणों का दावा है कि इन गोलों को आटे या चारे में मिलाकर जानवरों को मारने के लिए रखा जाता है। जैसे ही जानवर कौर लेते हैं, गोला फट पड़ता है—जबड़ा, मुंह और आंख तक क्षतिग्रस्त हो जाती है।
यह तरीका वही है, जिससे पहले भी जंगलों में जंगली जानवर और मवेशी बुरी तरह घायल होते रहे हैं। देहरी की घटना ने इन अवैध शिकारी गैंगों की सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जर्जर मकान से बरामद ‘मौत के लड्डू’
सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने पुलिस थाना जवाली को फोन किया। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जर्जर मकान की तलाशी ली और कई संदिग्ध गोले कब्जे में लिए। यह गोले किसी स्थानीय व्यक्ति द्वारा हाथ से तैयार किए गए प्रतीत होते हैं, जिनका मकसद केवल जानवरों को मारना बताया जा रहा है।इस बरामदगी के बाद से गांव में भय का माहौल है। पशुपालक अपने मवेशियों को जंगल या खुले मैदानों में चराने भेजने से डर रहे हैं।
एसपी का बयान—जांच तेज, आरोपी कौन?
एसपी नूरपुर, कुलभूषण वर्मा ने पुष्टि की कि घटना बेहद गंभीर है।“अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। बरामद गोलों की फॉरेंसिक जांच करवाई जाएगी और इसके पीछे कौन लोग हैं, इसकी गहन जांच चल रही है।”
उन्होंने ग्रामीणों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना देने की अपील की।
संवेदनशील मुद्दा—लेकिन कब रुकेगी यह हिंसा?
गौवंश को इस तरह विस्फोटकों से मारने की परंपरा न केवल गैरकानूनी बल्कि अत्यधिक क्रूर है। 15 साल पहले धमेटा में जिस दर्दनाक तरीके से एक गौमाता की जान गई थी, वही भयावह कहानी फिर दोहराई जा रही है।जंगल और गांवों में जानवरों को “आटे के लड्डू में गोला छिपाकर” मारने वाला यह नेटवर्क किसका है? कौन लोग मवेशियों को इस तरह छलनी कर रहे हैं? और क्यों?
यह घटनाएं सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक क्रूरता का भी चेहरा हैं—जिसे रोकने के लिए पुलिस के साथ-साथ समाज को भी सामने आना होगा।

