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एस एस पी शिमला संजीव कुमार के नेतृत्व शिमला में पुलिस ने नशों के सौदागरों और इनके द्वारा विछाऐ गए मकड़जाल को भेदकर तोडी इनकी कमर……

RamParkash Vats
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संकेतिक चित्र

शिमला,सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार:हिमाचल प्रदेश में चिट्टा माफिया का फैलता जाल जिस गति से युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहा था, उसी रफ्तार से अब पुलिस उस अंधेरे नेटवर्क को तोड़ने में जुट गई है। और यही बढ़ती सख्ती नशा सौदागरों में पहाड़ जैसा डर पैदा कर रही है। पिछले तीन वर्षों में पुलिस ने 100 से अधिक युवतियों व महिलाओं को नशा तस्करी में गिरफ्तार किया—यह आंकड़ा केवल अपराध का रिकॉर्ड नहीं बल्कि समाज पर टूटे दर्द, धोखे और शोषण की वे दास्तानें हैं जिन्हें पढ़कर भी रूह काँप उठती है। शिमला में 18 वर्षीय कॉलेज छात्रा की घटना इसका सबसे भयावह उदाहरण है। दो वर्ष पहले एक नज़दीकी दोस्त ने रोमांच के नाम पर उसे पहली बार चिट्टा चखाया और फिर धीरे-धीरे नशे का आदी बना डाला। नशे की तलब बढ़ी, तो वही दोस्त उसके शरीर और पैसों दोनों का सौदागर बन गया। परिवार की नाराज़गी और सामाजिक दबाव ने उसके टूटे विश्वास को और कमजोर किया। पढ़ाई में मेधावी यह युवती अब अपना जीवन नशे और शोषण के अंधेरे दौर में घसीटती फिर रही है। यह कोई अकेला सच नहीं—स्कूल व कॉलेज की अनगिनत छात्राएं पहले नशे की गिरफ्त में लाई जाती हैं, फिर ब्लैकमेल और दबाव के जरिए उन्हें तस्करी के दलदल में उतार दिया जाता है।

पुलिस की जांच बताती है कि इस पूरे खेल में सबसे बड़ा शिकार 14 से 25 वर्ष की लड़कियाँ बन रही हैं। उनकी मासूम उम्र, भावनात्मक कमजोरी और अकेलापन तस्करों के लिए आसान लक्ष्य साबित हो रहा है। अपर शिमला, मंडी, कुल्लू और सोलन से पढ़ने आई छात्राएं खासतौर पर खतरे में रहती हैं, क्योंकि किराए के कमरों में अकेले रहने का फायदा उठाकर तस्कर आसानी से उनकी पहुँच में आ जाते हैं। शैक्षणिक संस्थानों के आसपास सक्रिय यह गिरोह युवतियों के सपनों को धीरे-धीरे नशे की राख में बदल देता है। हाल ही में पकड़ी गई 19 वर्षीय युवती का मामला बेहद झकझोर देने वाला है—माता-पिता के विवाद और भावनात्मक तनाव के बीच वह केवल आठवीं कक्षा में ही तस्करों के संपर्क में आ गई थी। पांच वर्षों से वह लगातार चिट्टा ले रही थी और आज उसके खिलाफ दो तस्करी के मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार हुई अधिकतर युवतियाँ 18 से 25 वर्ष की हैं, यानी उनकी नशे की शुरुआत स्कूल के दिनों में ही हो चुकी थी। इस डरावनी सच्चाई ने पुलिस को और भी सतर्क और आक्रामक बना दिया है—और यही कारण है कि माफिया की रीढ़ अब हिलने लगी है।

इसी लगातार कार्रवाई के चलते नशा तस्करों में भारी हलचल और खौफ फैल गया है। पुलिस की छापेमारी, नेटवर्क की कड़ी निगरानी और स्कूल–कॉलेजों के आसपास गश्त बढ़ने के बाद कई सक्रिय तस्कर राज्य की सीमाओं से बाहर भागने की कोशिश कर रहे हैं। एसएसपी शिमला संजीव कुमार गांधी ने लोगों को चेताया है कि नशा माफिया न सिर्फ युवाओं को नष्ट कर रहा है, बल्कि युवतियों का बड़े पैमाने पर यौन व आर्थिक शोषण कर रहा है। उन्होंने कहा, “पुलिस इस पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने की दिशा में लगातार काम कर रही है। लेकिन परिवारों की जागरूकता और बच्चों पर निगरानी उतनी ही आवश्यक है।” पुलिस की इस सख्ती का असर यह है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को फांसने वाले कई गैंग भूमिगत हो गए हैं, कई पेडलर रोज़ाना छापेमारी के डर में जगह बदल रहे हैं और कई तस्कर अपनी लोकेशन लगातार बदलकर बचने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन पुलिस का रुख साफ है—नशा सौदागर अब चाहे जितने हथकंडे अपनाएं, प्रदेश में चिट्टे का यह काला साम्राज्य अब कानून की पकड़ से बच नहीं पाएगा। बढ़ती कार्रवाई की यही तेज़ रफ्तार आज माफिया की नींद उड़ा चुकी है और हिमाचल में नशा तस्करों पर पहाड़ जैसा दबाव बना हुआ है।

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