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हिमाचल सरकार का बड़ा कदम: दुग्ध समर्थन मूल्य बढ़ा, प्रसंस्करण ढांचा मजबूत, नए कार्यालय भवन का उद्घाटन; पशुपालकों की आय बढ़ाने पर सुक्खू सरकार का विशेष ध्यान

RamParkash Vats
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हिमाचल प्रदेश में पशुपालकों के हितों को केंद्र में रखकर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा धर्मशाला में पशुपालन विभाग के उपनिदेशक कार्यालय के नए भवन का उद्घाटन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया एक राजनीतिक संदेश भी है। करीब 3.21 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह भवन दर्शाता है कि राज्य सरकार पशुपालन को ग्रामीण विकास की रीढ़ मानते हुए इसे संस्थागत समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह कदम विशेष रूप से कांगड़ा जैसे बड़े जिले के पशुपालकों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

राजनीतिक दृष्टि से देखें तो दूध उत्पादकों के लिए बढ़ाया गया समर्थन मूल्य सरकार की किसान हितैषी नीति का स्पष्ट संकेत है। पिछले ढाई वर्षों में प्रति लीटर 21 रुपये की बढ़ोतरी और दूध परिवहन व दुर्गम क्षेत्रों के लिए दी जा रही अतिरिक्त सहायता न केवल आर्थिक राहत देती है, बल्कि आने वाले समय में सरकार और किसान समुदाय के बीच विश्वास व राजनीतिक मजबूती भी स्थापित करती है। दुग्ध उत्पादन को लाभकारी बनाने का यह निर्णय ग्रामीण वोट बैंक तक सीधा संदेश भेजता है कि सरकार उनकी मेहनत की उचित कीमत सुनिश्चित करने के लिए तत्पर है।

दूध प्रसंस्करण ढांचे को मजबूत करने के लिए ढगवार में 1.50 लाख लीटर क्षमता वाले प्लांट की स्थापना और दत्तनगर संयंत्र के विस्तार जैसे कदम सरकार की दूरदर्शी सोच को दर्शाते हैं। पिछली सरकार की तुलना में मिल्कफेड की खरीद क्षमता को 90 हजार लीटर से बढ़ाकर 3 लाख लीटर प्रतिदिन करना केवल प्रशासनिक उपलब्धि ही नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि वर्तमान सरकार ने दुग्ध क्षेत्र को प्राथमिकता दी है। राजनीतिक तौर पर यह संदेश ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और आमदनी बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

अंततः, मुख्यमंत्री सुक्खू का यह बयान कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ है, उनके विकास मॉडल की दिशा को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है। दुग्ध दरों में वृद्धि, प्रसंस्करण इकाइयों का विस्तार और परिवहन सहायता जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि सरकार पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने की ओर गंभीर है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों की उपस्थिति भी इस बात का संकेत है कि पशुपालन को राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकता देने का यह प्रयास व्यापक समर्थन के साथ आगे बढ़ रहा है।

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