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राजनीतिक मंथन: शीतकालीन सत्र सियासी गरमी में तब्दील

RamParkash Vats
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Dharmshala/28/11/2025 ब्यूरो चीफ विजय समया

धर्मशाला में जारी हिमाचल विधानसभा का शीतकालीन सत्र इस बार केवल विधायी कार्यों का मंच नहीं, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी संघर्ष का अखाड़ा बनता दिखाई दे रहा है। सामान्यतः यह सत्र नीतिगत विमर्श और विकास योजनाओं पर गंभीर चर्चा के लिए जाना जाता है, लेकिन वर्तमान स्थिति राजनीतिक टकराव की ओर अधिक झुकी दिख रही है। सत्ता और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने मुद्दों को जनता के सामने प्रमुखता से रखकर राजनीतिक लाभ लेने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

एक ओर विपक्ष पेंशनरों और कर्मचारियों के आर्थिक अधिकारों के मुद्दे पर सरकार को घेरे हुए है। भाजपा का आरोप है कि सरकार वरिष्ठ पेंशनरों के हितों की अनदेखी कर रही है और वित्तीय लाभों के भुगतान में अनावश्यक देरी कर रही है। विपक्ष इसे “कर्मचारी-विरोधी शासन” की संज्ञा देकर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार पेंशनरों को सड़क पर उतरना सरकार की संवेदनहीनता का परिणाम है, जिसे वे जनता के सामने प्रमुख मुद्दे के रूप में पेश करना चाहते हैं।

वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष केंद्र–राज्य संबंधों में अनदेखी को बड़ा सियासी हथियार बनाकर भाजपा पर पलटवार कर रहा है। कांग्रेस विधायकों का दावा है कि केंद्र सरकार ने आपदा राहत के नाम पर हिमाचल की उपेक्षा की है। 1500 करोड़ की घोषित राहत राशि न मिलने और पीडीएनए फंड के लंबित रहने को मुद्दा बनाते हुए सत्ता पक्ष इसे “केंद्र सरकार का भेदभाव” बताने में जुटा है। उनका लक्ष्य राज्य की जनता में यह संदेश स्थापित करना है कि प्रदेश की बदहाल आर्थिक स्थिति के लिए भाजपा-शासित केंद्र जिम्मेदार है।

दोनों पक्षों का एक ही मंच पर नारेबाजी करना, गेट पर आमने-सामने आना और सदन के भीतर कार्यवाही बाधित करना यह दर्शाता है कि शीतकालीन सत्र अब पूरी तरह चुनावी तेवरों में रंग चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज हो सकता है, क्योंकि दोनों दल अपने-अपने समर्थकों को संदेश देने के लिए इस सत्र को एक अवसर के रूप में उपयोग कर रहे हैं।साफ है—यह सत्र विधायी कार्यों से अधिक राजनीतिक मंथन का केंद्र बन गया है।

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