शिमला, 24/11/2025 ब्यूरो चीफ विजय समयाल
हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की अहम बैठक में लिए गए निर्णयों ने राज्य सरकार की दो प्रमुख प्राथमिकताओं—हरित परिवहन और नशा उन्मूलन—को एक बार फिर राजनीतिक रूप से प्रमुखता दे दी है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हुई इस बैठक में सरकार ने न केवल प्रशासनिक ढांचों में एकीकरण किया, बल्कि युवा मतदाताओं और शहरी-ग्रामीण परिवहन क्षेत्र को लक्षित करने वाले निर्णय भी लिए।
सबसे बड़े फैसलों में राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना–2023 के तहत 1000 पेट्रोल और डीज़ल टैक्सियों को इलेक्ट्रिक टैक्सी में बदलने को मंजूरी देना रहा। इसके लिए सरकार ने 40 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान करने का निर्णय लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह निर्णय सरकार की “ग्रीन इकोनॉमी” नीति को मजबूती देता है और शहरी मतदाताओं, टैक्सी यूनियनों तथा युवाओं में सकारात्मक प्रभाव छोड़ सकता है। यह कदम न केवल प्रदूषण नियंत्रण के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्व-रोजगार को बढ़ावा देने वाली सरकार की छवि को भी सुदृढ़ करता है। आगामी चुनावी माहौल में यह “हरित और आधुनिक हिमाचल” की राजनीतिक कथा को बल देगा।
प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए मंत्रिमंडल ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) का विलय कर गृह विभाग के अधीन एक एकीकृत स्पेशल टास्क फोर्स (STF) बनाने का निर्णय लिया। यह कदम नशा माफिया पर सख्ती और जांच तंत्र को केंद्रीकृत व शक्तिशाली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे सरकार एक संदेश देना चाहती है कि नशे के खिलाफ नीति में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। राजनीतिक रूप से यह उन जिलों में महत्वपूर्ण असर डाल सकता है जहां नशे की बढ़ती समस्या चुनावी मुद्दा बन चुकी है।
इसके साथ ही कैबिनेट ने राज्य भर में पंचायत स्तर पर एंटी-चिट्टा अभियान चलाने को मंजूरी दी। इसे ग्रामीण क्षेत्रों में नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए सामुदायिक जागरूकता का बड़ा प्रयास माना जा रहा है। राजनीतिक टिप्पणीकारों के अनुसार, पंचायतों की भागीदारी सरकार को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाती है और ग्रामीण मतदाताओं में “सख्त शासन” की छवि को स्थापित करती है।
इन सभी निर्णयों को मिलाकर देखा जाए तो सरकार ने एक ही बैठक में पर्यावरण, युवा हित, ग्रामीण भागीदारी और कानून-व्यवस्था—चारों मोर्चों पर रणनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नीति-निर्माण से अधिक एक राजनीतिक “नेरेटिव सेटिंग” है, जिसका लक्ष्य हिमाचल को आधुनिक, सुरक्षित और नशा-मुक्त बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करना है।

