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नशा-रोधी मोर्चे पर सरकार विफल: जयराम ठाकुर का तीखा हमला

RamParkash Vats
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शिमला, 24/11/2025 ब्यूरो चीफ विजय समयाल

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने नशे के बढ़ते जाल पर सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार “नशे के खिलाफ लड़ाई में पूरी तरह गंभीर नहीं है” और केवल “हेडलाइन व इवेंट मैनेजमेंट” के सहारे सुर्खियाँ बटोरने में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है, जिसके प्रमाण सरकार के अपने आंकड़ों से ही मिल रहे हैं।

जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि शिमला जिला की 412 में से 265 पंचायतें नशे की चपेट में हैं, जिनमें से 145 पंचायतों में नशा गहरे तक पैर पसार चुका है। यह विभाजन, उन्होंने बताया, स्वयं पुलिस विभाग ने तीन श्रेणियों में किया है—जो स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट दर्शाता है। उन्होंने कहा कि “सरकार कागज़ी योजनाएं बनाकर खुद को सफल बता रही है, जबकि सच्चाई पहाड़ों के गांव-गांव तक चिट्टा और ड्रग्स फैलने की है।”नेता प्रतिपक्ष ने आज सामने आई एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि चिट्टे की वजह से तीन पीढ़ियों का जीवन बर्बाद होने की मार्मिक कहानी किसी भी संवेदनशील सरकार की आंखें खोलने के लिए पर्याप्त होनी चाहिए। एक अन्य मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कांगड़ा में एक मां को अपने बच्चे के इलाज के लिए मजबूरी में नशा खरीदने जाना पड़ा, जिसके बाद वह जेल चली गई—“यह वह समाज नहीं जिसे हम बनाना चाहते हैं।”

जयराम ठाकुर ने पिछले सप्ताह नशा निवारण केंद्र में मारपीट से हुई एक व्यक्ति की मौत का मामला उठाते हुए कहा कि यह सरकार की नशा-रोधी नीति पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है। “जब नशा छुड़ाने के केंद्र ही हिंसा और मृत्यु के अड्डे बन जाएँ, तो सरकार की जिम्मेदारी कहाँ जाती है?” उन्होंने पूछा।उन्होंने बताया कि प्रदेश के 9 जिलों में कुल 102 पंजीकृत निजी पुनर्वास केंद्र हैं, जिनमें से 40 केंद्र बंद कर दिए गए हैं—जिनका कारण लगातार हिंसा, दुर्व्यवहार और गैर-चिकित्सीय तरीकों से नशा छुड़ाने की कोशिशें बताई जा रही हैं। “कई केंद्रों में युवाओं को न दवाइयाँ दी जाती थीं और न डॉक्टरों के पास ले जाया जाता था। बल्कि मारपीट कर उन्हें सुधारने की कोशिश की जाती रही,” नेता प्रतिपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए।

जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार की ढिलाई की कीमत युवा पीढ़ी चुका रही है। “न जाने कितने युवा समय से पहले मौत के मुंह में जा चुके हैं। यह सरकार केवल घोषणाओं में व्यस्त है, जमीनी लड़ाई कोई नहीं लड़ रहा।”नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि नशे के खिलाफ राज्य स्तर पर समन्वित अभियान, सख्त निगरानी और जवाबदेही की नई व्यवस्था बनाई जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार कार्रवाई नहीं करती तो विपक्ष इस मुद्दे को सदन से सड़क तक उठाएगा।

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