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सरकार की नूरपुर में चीनी मिल लगाने की तैयारी, उद्योग विभाग की समिति गठित— रोजगार और कृषि क्षेत्र में नया संचार, प्रदेश के औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार

RamParkash Vats
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SHIMLA:हिमाचल प्रदेश सरकार ने औद्योगिक और कृषि क्षेत्र में एक नई पहल करते हुए कांगड़ा जिले के नूरपुर में चीनी मिल स्थापित करने की योजना को मंजूरी दी है। इस दिशा में सरकार ने पंजाब सीमा से सटी चीनी मिलों के बाजार मूल्य का आकलन करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। इस परियोजना से न केवल गन्ना उत्पादक किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। औद्योगिक विकास की इस नई पहल से प्रदेश के आर्थिक ढांचे को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

उद्योग विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, समिति का गठन उद्योग विभाग के निदेशक की अध्यक्षता में किया गया है, जबकि अतिरिक्त निदेशक (विकास) को इसका समन्वयक नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, विभाग के संयुक्त निदेशक (नीति), संयुक्त निदेशक (परियोजना) और कृषि विभाग के अतिरिक्त/संयुक्त निदेशक को भी समिति में शामिल किया गया है। समिति नूरपुर क्षेत्र में चीनी मिल की संभावनाओं, निवेश लागत, उत्पादन क्षमता और क्षेत्रीय मांग की विस्तृत समीक्षा करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य हिमाचल में गन्ना उद्योग को बढ़ावा देना और प्रदेश को आत्मनिर्भर औद्योगिक राज्य की दिशा में आगे बढ़ाना है।

राज्य सरकार का मानना है कि नूरपुर क्षेत्र में चीनी मिल की स्थापना से गन्ना उत्पादकों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिलेगा और उन्हें परिवहन व्यय में भी राहत होगी। वर्तमान में किसानों को अपनी उपज पंजाब या हरियाणा की मिलों में भेजनी पड़ती है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ जाते हैं। स्थानीय स्तर पर मिल स्थापित होने से यह समस्या समाप्त होगी। साथ ही, गन्ना उत्पादन को प्रोत्साहन मिलने से क्षेत्र में खेती का स्वरूप भी बदलेगा और अधिक किसान नकदी फसलों की ओर अग्रसर होंगे।

अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि यह समिति पंजाब सीमा से सटे क्षेत्रों में संचालित चीनी मिलों के निष्पक्ष बाजार मूल्य का अध्ययन करेगी और अपनी रिपोर्ट शीघ्र सरकार को सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर परियोजना की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक विकास और किसानों की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। प्रदेश सरकार की यह योजना “ग्रामीण विकास और औद्योगिक विस्तार” की दिशा में एक दूरदर्शी कदम के रूप में देखी जा रही है।

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